SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग रिपोर्टर (SIR) से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। इस मामले पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर से ही चुनाव आयोग (EC) से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठने लगी है। बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों में से एक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के बाद अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी आयोग से इस पर जवाब मांगा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े इस विवाद के कारण आम जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है। कुशवाहा ने जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे को तुरंत सुलझाना आवश्यक है, ताकि लोगों का भ्रम दूर हो सके। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह बिना किसी देरी के इस पूरे प्रकरण पर अपना स्पष्टीकरण जारी करे।
NDA के भीतर से उठ रहे सवाल
उपेंद्र कुशवाहा से पहले केंद्र सरकार में मंत्री और भाजपा के सहयोगी चिराग पासवान भी चुनाव आयोग से ऐसी ही मांग कर चुके हैं। चिराग पासवान ने कहा था कि चुनाव आयोग को आगे आकर जनता की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को ज्यादा महत्व नहीं दिया था। चिराग ने यह भी साफ किया था कि सरकार का हिस्सा होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर हाल में किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करेंगे।
कुशवाहा के रुख में आया बड़ा बदलाव
यह दिलचस्प है कि एक दिन पहले तक उपेंद्र कुशवाहा इस SIR विवाद पर बोलने से बच रहे थे। गुरुवार को पटना में जब मीडियाकर्मियों ने उनसे इस विवाद के संबंध में सवाल किया था, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। तब उन्होंने कहा था कि यह चुनाव आयोग का आंतरिक मामला है और दो लोगों के बीच मतभेद होना कोई अस्वाभाविक बात नहीं है। महज एक दिन के भीतर उनके रुख में आए इस बदलाव की सियासी हलकों में काफी चर्चा हो रही है, जिससे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर कहा, “SIR से जुड़े विवाद के कारण आम जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है। इस मुद्दे को तुरंत एड्रेस करने की जरूरत है, ताकि लोगों का कंफ्यूजन दूर हो सके। चुनाव आयोग से अपील है कि वह बिना किसी देरी के इस पर अपना स्पष्टीकरण दे।”
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग के भीतर का यह विवाद अब NDA के लिए भी एक चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इस मामले पर कब और क्या स्पष्टीकरण देता है, और इसका राजनीतिक असर क्या होता है।







