Darbhanga DMCH Strike: बिहार के दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में डॉक्टरों की हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। बुधवार रात से शुरू हुई चिकित्सकों की यह अनिश्चितकालीन हड़ताल अब तक नहीं टूटी है, जिससे इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। दो दिनों से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरभंगा के साथ-साथ मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल और नेपाल से आए मरीज व उनके परिजन इलाज के लिए भटक रहे हैं।
शुक्रवार सुबह DMCH के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा के इमरजेंसी पहुंचने के बाद ओपीडी और इमरजेंसी रजिस्ट्रेशन काउंटर एक घंटे के लिए खोला गया। इस दौरान सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट चिकित्सकों ने कुछ मरीजों का उपचार भी किया, लेकिन पीजी डॉक्टरों ने तुरंत हस्तक्षेप कर रजिस्ट्रेशन बंद करवा दिया। इसके बाद डॉक्टर फिर से धरना स्थल पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
दरभंगा DMCH में मचा हाहाकार! डॉक्टर हड़ताल पर, मरीज लौटे, अस्पताल में पुलिस तैनात
Darbhanga DMCH Strike: दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) में जूनियर डॉक्टरों की दो दिन से जारी हड़ताल ने चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह से चरमरा दिया है। इस गंभीर स्थिति के कारण पांच हजार से अधिक मरीज बिना इलाज के ही वापस लौटने को मजबूर हुए हैं। शुक्रवार को अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया, जिससे तनाव का माहौल बना रहा।
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे चिकित्सा सेवा बहाल करने का प्रयास किया गया था, लेकिन कुछ ही देर बाद पीजी डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच फिर विवाद छिड़ गया। दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत की स्थिति बनने के बाद एक बार फिर चिकित्सा सेवा बाधित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को शांत कराया, जिसके बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। फिलहाल अस्पताल में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
DMCH हड़ताल: मरीज लौटे, दूरदराज से आए लोग परेशान
जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल ने दूर-दराज से आए मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। उन्हें इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, और गंभीर मरीजों के परिजनों की परेशानी सबसे अधिक है। यह हड़ताल बुधवार की रात से जारी है, जब इमरजेंसी में एक महिला परिजन और डॉक्टरों के बीच हुए विवाद के बाद स्थिति बिगड़ गई थी।
शुक्रवार सुबह करीब डेढ़ घंटे तक चिकित्सा सेवा बहाल रहने से थोड़ी राहत मिली थी, इस दौरान करीब आठ से ऊपर मरीजों का इलाज भी किया गया। हालांकि, इसके बाद विवाद बढ़ने से सेवा फिर से बाधित हो गई। ओपीडी पहुंचे मरीजों को भी निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
गतिरोध तोड़ने के लिए प्रशासन की लगातार वार्ता जारी
चिकित्सा सेवा को सामान्य करने और गतिरोध को समाप्त करने के लिए जिला और अस्पताल प्रशासन लगातार डॉक्टरों के साथ बातचीत कर रहा है। गुरुवार रात को हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, और शुक्रवार को भी बातचीत का दौर जारी है। इस बीच, डीएमसीएच के सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था सामान्य बनी हुई है, जहाँ मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में मिली इस राहत से कुछ मरीजों को थोड़ी मदद मिली है, लेकिन मुख्य अस्पताल में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगें: सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था पर अड़े
डॉक्टरों का यह आंदोलन बुधवार रात मधुबनी के पंडौल थाना क्षेत्र स्थित मेघौल गांव की शीला देवी के परिजनों और ड्यूटी पर तैनात एक पीजी डॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद शुरू हुआ। डॉक्टरों का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकों की सुरक्षा एक गंभीर समस्या बनी हुई है। मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं के बावजूद सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। घायल डॉक्टर पंकज ने बताया कि कुछ लोगों ने इमरजेंसी बंद होने पर पूछताछ की और इसी दौरान विवाद बढ़ा। मारपीट में उनके दाहिने हाथ की हथेली के पास की हड्डी टूट गई, जिसके बाद उन्हें प्लास्टर कराना पड़ा।
जीडीए अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा ने कहा, “डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग मरीजों के हित से जुड़ी है। अस्पताल में इलाज के दौरान जो कमियां और अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें दूर किया जाए। दूसरी प्रमुख मांग चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर है। जो सक्षम अधिकारी इन मांगों का समाधान कर सकते हैं, वे डॉक्टरों से वार्ता करें और मांगों को पूरा करें। इसके बाद ही डॉक्टर धरना समाप्त कर मरीजों के इलाज में पूरी तरह लौटेंगे।”
डॉक्टरों ने अपने धरना स्थल पर ‘प्रशासन क्यों अनजान है’, ‘डॉक्टर भी इंसान है, जान बचाने वाले की जान खतरे में क्यों’, ‘जो जीवन बचाते हैं उनकी सुरक्षा दो’, ‘हिंसा नहीं, डॉक्टर को डराओगे तो इलाज किससे कराओगे’ जैसे नारे लिखी तख्तियां प्रदर्शित कीं। उन्होंने हॉस्टल की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया, जिसमें जल निकासी की समस्या, छत से पानी टपकना और छज्जे गिरने का खतरा शामिल है।
48 घंटे बाद भी प्रशासन मौन
जीडीए अध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा ने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधीक्षक के साथ कई दौर की बातचीत हुई है, और उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र की मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, डॉक्टरों की कई मांगें अधीक्षक के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उन्होंने बताया कि एसडीएम कुमार गौरव और एडीएम समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि जिलाधिकारी स्वयं आकर उनसे बात करें।
डॉ. कुणाल कुमार झा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “48 घंटे से अधिक समय से इमरजेंसी सेवा प्रभावित है, इसके बावजूद जिले के बड़े अधिकारी चिकित्सकों से बात करने नहीं पहुंचे हैं। यदि जिलाधिकारी खुद आकर डॉक्टरों की बात सुनते और उनकी समस्याओं को समझते तो संभव है कि आंदोलन पहले ही समाप्त हो जाता।”
DMCH अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि डॉक्टरों से कई दौर की वार्ता हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि जिलाधिकारी आकर उनसे बात करें, तभी वे काम पर लौटेंगे। अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि उनके स्तर से जो भी मांगें पूरी की जा सकती हैं, उन्हें तत्काल पूरा किया जाएगा। जिन समस्याओं का समाधान उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, उनके लिए स्वास्थ्य विभाग और वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि कर्पूरी चौक के पास DMCH का नया हॉस्टल और मेडिसिन वार्ड निर्माणाधीन है, जिससे भविष्य में सुविधाएं बेहतर होंगी। फिलहाल, जलजमाव की समस्या से निपटने के लिए पंपिंग सेट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इधर, मरीजों के परिजनों में इलाज न मिलने को लेकर भारी नाराजगी है। मधुबनी के कल्याणपुर निवासी नरेश महतो की परिजन रिंकी देवी ने आरोप लगाया कि जब इलाज नहीं करना था तो पर्ची क्यों काटी गई और उसके पैसे क्यों लिए गए। मधुबनी के धोबी टोला सुंदर नगर वार्ड नंबर-8 निवासी मो. जफर ने तो मारपीट और मोबाइल क्षतिग्रस्त करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि पर्ची कटवाने के बाद इलाज के बारे में पूछने पर उनसे मारपीट की गई और वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिए गए। इस मामले की सूचना डायल-112 को दी गई है और परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है। हालांकि, पुलिस जांच के बाद ही इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हो पाएगी।
DMCH में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उत्पन्न गतिरोध ने मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जब तक जिलाधिकारी स्वयं हस्तक्षेप नहीं करते और डॉक्टरों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक इमरजेंसी सेवाओं का सामान्य होना मुश्किल लग रहा है।







