Bihar High Court: देश की सर्वोच्च अदालत ने पटना हाईकोर्ट के एक विवादित फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के एक आरोपी को यह कहकर बरी कर दिया था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना और उसकी छाती दबाना दुष्कर्म का प्रयास नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में की गई टिप्पणियों को आपत्तिजनक मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है, जिसके बाद न्यायिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
पटना हाईकोर्ट का विवादित फैसला और सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
पटना हाईकोर्ट ने बीते 9 जुलाई को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में दुष्कर्म के प्रयास के एक आरोपी की सजा रद्द कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना या उसकी छाती दबाना यह साबित नहीं करता कि यह दुष्कर्म का प्रयास है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी ने जबरन यौन संबंध बनाने या दुष्कर्म के इरादे से कोई हरकत की थी। निचली अदालत ने एक फोटोग्राफी स्टूडियो के अंदर महिला क्लाइंट के साथ यौन उत्पीड़न की कोशिश के आरोप में युवक को दोषी ठहराया था। पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) और 511 (अपराध का प्रयास) के तहत मिली सजा को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह मामला ज्यादा से ज्यादा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की मर्यादा भंग करना) के तहत अपराध हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी मोहना की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के इस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया। शीर्ष अदालत ने अपनी सुनवाई में पाया कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां बेहद आपत्तिजनक हैं।
सर्वोच्च अदालत ने इस गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट रजिस्ट्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा है कि वह स्थानीय पुलिस के जरिए यह सुनिश्चित करें कि नोटिस हाईकोर्ट तक पहुंच जाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट का पक्ष सुनने के बाद ही वह इस फैसले को रद्द करने पर विचार करेगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी ऐसा ही मामला, तब सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट को पटना हाईकोर्ट के इस आदेश की जानकारी तब हुई, जब चीफ जस्टिस इलाहाबाद हाईकोर्ट की इसी तरह की एक टिप्पणी पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना दुष्कर्म के प्रयास के अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद पटना हाईकोर्ट ने इसी तरह के तथ्यों और टिप्पणियों के आधार पर अपना फैसला सुनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने के बाद शीर्ष अदालत ने देश के सभी जजों को यौन अपराधों के मामलों को संवेदनशीलता के साथ निपटने के लिए विशेष दिशानिर्देश भी जारी किए थे। अब देखना यह होगा कि पटना हाईकोर्ट इस नोटिस का क्या जवाब देता है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे क्या फैसला लेती है।







