Insurance Sector: केंद्रीय बजट 2026 भारत के बीमा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 100% FDI के बाद निवेश तो बढ़ा है, लेकिन देश में 70% से अधिक का “प्रोटेक्शन गैप” अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उद्योग जगत की मांगें स्पष्ट हैं और आगामी बजट से उन्हें व्यापक राहत की उम्मीद है, जिससे आम आदमी के लिए बीमा की पहुंच और किफायतीता बढ़े।
बजट 2026: क्या बीमा क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित होगा?
बीमा क्षेत्र के लिए उद्योग की मुख्य मांगें
बीमा कंपनियों और पॉलिसीधारकों का मानना है कि स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस पर मौजूदा 18% GST दर को कम किया जाना चाहिए। यह आम जनता के लिए बीमा उत्पादों को अधिक सुलभ बनाएगा। इसके अलावा, जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 80C से अलग कर लाभ की मांग की जा रही है, जो लोगों को लंबी अवधि की बचत और सुरक्षा के लिए प्रोत्साहित करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य कवर पर अधिक कर लाभ और राहत भी उद्योग की प्राथमिकताओं में से एक है। इसके साथ ही, “कम्पोजिट लाइसेंसिंग” और “बीमा सुगम” जैसे डिजिटल सुधारों को लागू करने की बात भी जोर पकड़ रही है। ये सुधार बीमा प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और अधिक किफायती बनाने में मदद करेंगे, जिससे उपभोक्ता अनुभव बेहतर होगा।
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आयुष्मान भारत और आम आदमी की सुरक्षा
यदि सरकार “आयुष्मान भारत” जैसी योजनाओं का दायरा बढ़ाती है, तो करोड़ों मध्यम-वर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। यह न केवल बीमा की पैठ बढ़ाएगा बल्कि वित्तीय आपात स्थितियों से निपटने में भी सहायक होगा। बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए बीमा को एक वास्तविक सुरक्षा कवच बनाने का अवसर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


