India-US Trade Deal
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: अमेरिका को लगा था कि टैरिफ लगाकर उसने भारत को एक मजबूत संदेश दिया है, लेकिन असलियत में तो भारत ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब अमेरिकी सांसद राष्ट्रपति ट्रंप से अपील कर रहे हैं कि वे भारत द्वारा लगाए गए 30 प्रतिशत टैरिफ को हटवाएं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में नया मोड़ आ गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: दालों पर 30% टैरिफ हटाने के लिए अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप से की अपील
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: दालों के टैरिफ पर अमेरिकी सांसदों की चिंता
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 16 जनवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लिखे एक पत्र में मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने अपने देश के किसानों के हितों की रक्षा का हवाला देते हुए अमेरिकी दालों पर भारत द्वारा लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क को कम करने का आग्रह किया। सीनेटरों ने तर्क दिया कि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो वैश्विक खपत का लगभग 27 प्रतिशत है। ऐसे में अमेरिकी दलहन पर भारत के टैरिफ से उनके किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इस शुल्क के कारण भारत के लिए अमेरिकी दालों व मटर के निर्यात में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

सीनेटरों ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर भारत में सबसे अधिक खाई जाने वाली दालों में से हैं, लेकिन भारत ने इन श्रेणियों में अमेरिकी निर्यात पर भारी टैरिफ लगा रखा है। इस स्थिति के चलते, यहां उगाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद को भारत में निर्यात करते समय प्रतिस्पर्धी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। डेन्स और क्रेमर ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दलहन फसलों पर टैरिफ को लेकर बात करना अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं दोनों के लिए पारस्परिक रूप से फायदेमंद होगा। यह कदम दोनों देशों के लिए व्यापारिक संतुलन को सुधारने में मदद करेगा।
व्यापार समझौते की प्रगति और भविष्य
इन घटनाक्रमों के बीच, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक बयान में कहा कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें लगभग सभी शेष मुद्दों पर काम कर रही हैं। अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जब दोनों पक्ष सही समय पर सहमत हो जाएंगे तो इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वैश्विक व्यापार में इस तरह के समझौतों का असर न सिर्फ कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है, बल्कि यह समग्र आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देता है।
भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापारिक वार्ता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल दालों जैसे विशिष्ट कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात पर असर डालेगी, बल्कि व्यापक आर्थिक सहयोग के नए द्वार भी खोलेगी। दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







