IPO: भारतीय शेयर बाजार में हलचल तेज होने वाली है क्योंकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) अब हकीकत के करीब दिख रहा है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) इस महीने के आखिर तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) जारी कर सकता है, जिससे भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में से एक का पब्लिक ऑफरिंग का रास्ता साफ हो जाएगा।
अब NSE का IPO, क्या होगी लिस्टिंग? सेबी इस महीने दे सकता है मंजूरी
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में बताया, “हमें उन्हें NoC देना है और फिर NSE को DRHP वगैरह फाइल करने की दूसरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। शायद, यह (NoC) इस महीने तक जारी कर दिया जाएगा।” यह खबर उन निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है जो लंबे समय से NSE के शेयर बाजार में उतरने का इंतजार कर रहे थे।
किसी भी कंपनी या स्टॉक एक्सचेंज को आईपीओ लाने से पहले मार्केट रेगुलेटर सेबी और अन्य संबंधित पक्षों से मंजूरी लेनी होती है। यह NoC एक अहम रेगुलेटरी अप्रूवल है जो यह सुनिश्चित करता है कि आईपीओ लाने के मामले में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आम कंपनियों से अलग, स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन जैसे वित्तीय बाजार के बुनियादी ढांचे से जुड़े संस्थानों को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा करने से पहले सेबी से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है। यह कदम भारत के वित्तीय बाजार की स्थिरता और कामकाज के लिए उनके महत्व को उजागर करता है।
NSE IPO: क्यों रुका था मामला और अब आगे क्या?
NSE का IPO डार्क फाइबर केस की वजह से अटक गया था। इस मामले में आरोप लगे थे कि 2010 से 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के को-लोकेशन सर्वर तक तेज प्राइवेट कम्युनिकेशन लाइनों के जरिए खास एक्सेस मिला, जिससे ट्रेड जल्दी एग्जीक्यूट हो सके।
अप्रैल 2019 में, सेबी ने NSE को कथित गैर-कानूनी कमाई के 62.58 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया और इससे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों से बैन कर दिया था। सेबी ने 2022 में NSE पर 7 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने रद्द कर दिया था। इसके बाद सेबी ने सितंबर 2023 और फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट में SAT के आदेश को चुनौती दी थी। इस कानूनी लड़ाई के खत्म होने के बाद ही NSE का IPO आने की उम्मीद है।
बाजार में NSE का दबदबा और निवेशकों की दिलचस्पी
इनक्रेड के आंकड़ों के मुताबिक, NSE के अनलिस्टेड शेयर की कीमत 2,045 रुपये प्रति शेयर है, जिससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.06 ट्रिलियन रुपये हो गया है। यह आंकड़ा इसे लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी BSE के आकार का लगभग पांच गुना बनाता है, जिसका मार्केट कैप शुक्रवार तक एक्सचेंज डेटा के अनुसार 1.09 ट्रिलियन रुपये था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, 30 नवंबर तक इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी 92.7 प्रतिशत और इक्विटी ऑप्शंस सेगमेंट में 74.3 प्रतिशत थी। यह बाजार में NSE की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
खास बात यह है कि NSE के शेयरों की कीमत अधिक होने के बावजूद रिटेल निवेशकों की इसके आईपीओ में जबरदस्त दिलचस्पी बनी हुई है। लगभग 1.46 लाख निवेशकों के पास एनएसई के शेयर हैं, जिनकी कीमत 2 लाख रुपये से कम है। यह दर्शाता है कि छोटे निवेशक भी इस प्रतिष्ठित स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। वित्तीय बाजार के जानकारों का मानना है कि NSE का आईपीओ न केवल भारतीय पूंजी बाजार को गहराई देगा, बल्कि निवेशकों को एक ऐसे प्रमुख संस्थान में निवेश करने का मौका भी देगा जो देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


