Makar Sankranti 2026: सनातन धर्म में मकर संक्रांति और एकादशी तिथियों का विशेष महत्व है, और जब ये दोनों पावन पर्व एक साथ आते हैं, तो एक ऐसा दुर्लभ शुभ योग बनता है जो भक्तों के लिए असीम पुण्य का द्वार खोल देता है।
मकर संक्रांति 2026: 23 साल बाद अद्भुत संयोग, षटतिला एकादशी पर इन गलतियों से बचें और पाएं अक्षय पुण्य
मकर संक्रांति 2026 और षटतिला एकादशी का महासंयोग
सनातन धर्म में मकर संक्रांति और एकादशी तिथियों का विशेष महत्व है, और जब ये दोनों पावन पर्व एक साथ आते हैं, तो एक ऐसा दुर्लभ शुभ योग बनता है जो भक्तों के लिए असीम पुण्य का द्वार खोल देता है। इस वर्ष 2026 में, मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का अत्यंत पावन और दुर्लभ ‘महासंयोग’ बन रहा है। लगभग 23 वर्षों के बाद घटित हो रहा यह अद्भुत संयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र योग में श्रद्धापूर्वक की गई पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और व्रत आदि कई गुना अधिक फलदायक होते हैं। किंतु कई बार अनजाने में की गई कुछ गलतियों के कारण भक्त पुण्यफल प्राप्ति से वंचित रह सकते हैं। आइए जानते हैं, पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु से, किन गलतियों के कारण इस पावन अवसर पर प्राप्त होने वाले पुण्य फल नष्ट हो सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि इस विशिष्ट अवधि में हमें क्या करना चाहिए और किन वर्जित कार्यों से बचना चाहिए। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का महत्व
षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना तिल के छह प्रकार के उपयोग से की जाती है। इन छह प्रकार में तिल का लेपन, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का तर्पण, तिल का दान और तिल का सेवन शामिल है। वहीं, मकर संक्रांति वह पवित्र दिन है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। दोनों पर्वों का एक साथ होना आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति का सुअवसर प्रदान करता है।
शुभ मुहूर्त 2026
| पर्व का नाम | तिथि | समय |
| :————– | :—————- | :———————– |
| मकर संक्रांति | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | प्रातः 08:30 बजे से |
| षटतिला एकादशी | बुधवार, 14 जनवरी 2026 | सूर्योदय से एकादशी तिथि समाप्त होने तक |
षटतिला एकादशी पर वर्जित कार्य
- इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
- एकादशी के दिन जुआ खेलना, निंदा करना, चोरी करना या किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य से बचना चाहिए।
- क्रोध, लोभ और मोह का त्याग करना चाहिए।
- बाल काटना और नाखून काटना भी इस दिन वर्जित है।
- किसी भी गरीब या जरूरतमंद का अपमान न करें।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें।
मकर संक्रांति पर ध्यान रखने योग्य बातें
- मकर संक्रांति के दिन स्नान किए बिना भोजन नहीं करना चाहिए।
- सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- इस दिन लहसुन, प्याज और मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
- पुराने वस्त्रों का दान करें और नए वस्त्र धारण करें।
- किसी से झगड़ा न करें और कटु वचन न बोलें।
- खिचड़ी, तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान करें।
मंत्र जाप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥
गंगा चा यमुना चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
निष्कर्ष और उपाय
इस अद्भुत महासंयोग पर पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करने से भगवान विष्णु और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इन पावन तिथियों पर तिल का दान, गंगा स्नान और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विशेष फलदायी होता है। इन गलतियों से बचते हुए और नियमों का पालन करते हुए, आप इस दुर्लभ शुभ योग का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि, आरोग्य तथा मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करें कि आपके सभी कार्य धर्म के मार्ग पर हों और आपका मन शांत व पवित्र हो।







