Nalini Jaywant News: हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की वो अदाकारा जिसकी खूबसूरती ने मधुबाला को भी मात दे दी थी, आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में राज करती है। एक ऐसी शख्सियत जिनकी सादगी और दिलकश अदाओं ने लाखों को अपना दीवाना बनाया, उनकी कहानी किसी फिल्मी परदे से कम नहीं।
# Nalini Jaywant: जब इस हसीना ने अपनी खूबसूरती से मधुबाला को भी छोड़ा पीछे, जानिए दिग्गज अदाकारा की अनसुनी कहानी!






## Nalini Jaywant का प्रारंभिक जीवन और फिल्मी दुनिया से नाता
Nalini Jaywant News: हिंदी सिनेमा में नलिनी जयवंत का नाम उन सितारों में शुमार है, जिनकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ी। 40 और 50 के दशक में उनकी मुस्कान, अदाएं और सादगी दर्शकों के दिलों पर राज करती थी। उस दौर में उनकी खूबसूरती की तुलना अक्सर महान अभिनेत्री मधुबाला से की जाती थी, लेकिन एक बार तो नलिनी ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साल 1952 में एक मशहूर फिल्म मैगजीन ने ब्यूटी पोल कराया, जिसमें नलिनी जयवंत ने मधुबाला को पछाड़कर सबको हैरान कर दिया था। यह उस वक्त किसी चमत्कार से कम नहीं था।
नलिनी जयवंत का जन्म 18 फरवरी 1926 को मुंबई (तब बॉम्बे) में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक कस्टम ऑफिसर थे और उन्हें फिल्मी दुनिया बिल्कुल पसंद नहीं थी। इसके बावजूद, नलिनी का झुकाव बचपन से ही संगीत और नृत्य की ओर था और उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत ट्रेनिंग भी ली थी। फिल्मी दुनिया से उनका रिश्ता पहले से ही गहरा था, क्योंकि वह मशहूर अभिनेत्री शोभना समर्थ की चचेरी बहन थीं। शोभना समर्थ खुद अभिनेत्री तनुजा की मां थीं, जो आगे चलकर काजोल की मां बनीं। इस तरह नलिनी जयवंत काजोल के परिवार का भी हिस्सा थीं।
साल 1941 में महबूब खान की फिल्म ‘बहन’ से नलिनी ने बतौर अभिनेत्री अपना फिल्मी सफर शुरू किया। उस समय वह काफी कम उम्र की थीं, लेकिन कैमरे के सामने उनका आत्मविश्वास और अभिनय दर्शकों को प्रभावित कर गया। इस युवा बॉलीवुड एक्ट्रेस ने अपनी पहली ही फिल्म से यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ खूबसूरत ही नहीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली अदाकारा भी हैं। धीरे-धीरे इंडस्ट्री में उनका नाम गूंजने लगा।
## जब फिल्मी पर्दे पर मचाया था धमाल
1950 का दशक नलिनी जयवंत के करियर का सबसे सुनहरा दौर साबित हुआ। अशोक कुमार के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब सराहा। ‘समाधि’ और ‘संग्राम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार का दर्जा दिला दिया। साल 1950 में निर्देशक ज्ञान मुखर्जी की फिल्म ‘संग्राम’ में उन्होंने अपनी बोल्ड इमेज से खूब सनसनी मचाई थी, जो उस समय काफी चर्चा का विषय बनी थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उसी दौर में उनकी खूबसूरती इतनी मशहूर हो गई कि फिल्मफेयर मैगजीन के ब्यूटी पोल में उन्हें देश की सबसे सुंदर अभिनेत्री चुना गया, जहाँ उन्होंने मधुबाला जैसी बड़ी स्टार को पीछे छोड़ दिया। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण था कि नलिनी उस समय दर्शकों के दिलों पर राज कर रही थीं।
उन्होंने ‘जलपरी’, ‘सलोनी’, ‘काफिला’, ‘नाज’, ‘लकीरें’, ‘नौ बहार’, ‘शेरू’ और ‘मिस्टर एक्स’ जैसी कई अन्य सफल फिल्मों में भी शानदार काम किया। नलिनी जयवंत केवल अभिनय तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि उन्होंने कई फिल्मों में खुद गाने भी गाए, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
## बदलते दौर में और बिग बी की मां का किरदार
हालांकि, समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री बदलने लगी और 60 के दशक के बाद नलिनी को पहले जैसे दमदार रोल मिलने बंद हो गए। साल 1965 में फिल्म ‘बॉम्बे रेस कोर्स’ के बाद उन्होंने फिल्मों से एक तरह की दूरी बना ली। करीब 18 साल बाद, वह 1983 में फिल्म ‘नास्तिक’ में एक बार फिर परदे पर नज़र आईं, जहाँ उन्होंने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की मां का यादगार किरदार निभाया। इस फिल्म के बाद उन्होंने अभिनय से पूरी तरह संन्यास ले लिया।
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## निजी जीवन की उलझनें और दुखद अंत
नलिनी जयवंत का निजी जीवन भी कई उलझनों से भरा रहा। उन्होंने दो शादियां कीं, लेकिन उन्हें संतान का सुख नहीं मिल पाया। उनकी पहली शादी साल 1945 में निर्देशक वीरेंद्र देसाई से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता कुछ सालों बाद टूट गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद, उन्होंने 1960 में अभिनेता प्रभु दयाल से दूसरी शादी की।
दूसरे पति प्रभु दयाल के निधन के बाद वह पूरी तरह अकेली पड़ गईं। 22 दिसंबर 2010 को 84 साल की उम्र में नलिनी जयवंत का निधन हो गया। दुखद बात यह रही कि उनकी मृत्यु का पता उनके निधन के तीन दिन बाद चला, जिसने हिंदी सिनेमा के एक चमकदार सितारे के जीवन के दुखद अंत को दर्शाया।







