Bihar Hindu Rashtra: योग गुरु रामदेव के ‘हिंदू राष्ट्र’ और धर्म परिवर्तन को लेकर दिए गए बयान ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है। उनके इस दावे ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच हलचल पैदा कर दी है कि मुस्लिम हों या ईसाई, सबके पूर्वज हिंदू ही हैं। बिहार समेत पूरे देश में इस बयान के बाद ‘हिंदू राष्ट्र’ के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
पतंजलि योग पीठ के सहसंस्थापक और संन्यासी रामदेव ने कहा है कि जो लोग हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे पंथों में गए हैं, उनके पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे लोगों को अपने पूर्वजों की सनातन परंपरा का पालन करना चाहिए।






मुसलमानों-ईसाइयों के पूर्वज सनातनी हिंदू: रामदेव का दावा
रामदेव ने अपने बयान में कहा कि मजहब भले ही अलग हों, लेकिन पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने 2009 के देवबंद दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू आर्य वैदिक हैं।
“डरते क्यों हो। हिंदू राष्ट्र बन जाएगा तो मुसलमानों कहां जाएंगे, कहां जाएंगे, अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाओ। अरे जो अपने बाप का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि लोग दाढ़ी रखें, मूंछ कटाएं, टोपी पहनें या पगड़ी, लेकिन उनका चरित्र अपने पूर्वजों जैसा ही होना चाहिए। रामदेव ने स्पष्ट किया कि मुसलमानों और ईसाइयों को इससे कोई खतरा नहीं है। उन्होंने वेटिकन सिटी, मक्का मदीना और मदरसों से जारी होने वाले फतवों का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे लोग उन्हें मानते हैं, वैसे ही संतों का आदेश भी मानना चाहिए।
कांग्रेस बोली: ‘दरारें क्यों डालते हो?’ AIMIM का पलटवार: ‘किसी के बाप से नहीं डरते’
रामदेव के बयान पर कांग्रेस और ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उनके बयान पर सवाल उठाए।
“घबराने की तो जरूरत नहीं है, लेकिन पूछ तो उनसे लीजिए, जो हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं। उनसे पूछ लेते, बाबा रामदेव से पूछ लेते। उन्होंने ये बात कही है न। मैं कैसे बताऊं इनके मन में क्या है, किस परिप्रेक्ष्य में वो इस बात को बोल रहे हैं?”
खुर्शीद ने आगे कहा कि अगर सब सनातनी थे, तो फिर समाज में इतनी दरारें क्यों डाली जाती हैं? उन्होंने ‘सबको सनातनी मान लेने’ की बात पर जोर दिया। समाजवादी पार्टी ने भी रामदेव के बयान को भाजपा द्वारा संस्कृति थोपने की कोशिश बताया है।
AIMIM के प्रवक्ता वारिस पठान ने रामदेव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
“सुनो बोबा, मुसलमान किसी के बाप से नहीं डरता है। हम संविधान का सम्मान करते हैं। अपनी बात कायदे कानून के दायरे में रखकर करते हैं। हमारी खामोशी को डर की गिनती में मत लो। आप संविधान को मानते नहीं हैं। डरने-घबराने की क्या बात करना।”
संविधान की दुहाई और ‘हिंदू राष्ट्र’ की बहस
रामदेव के इस बयान ने भारत के पंथनिरपेक्ष स्वरूप और ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उनके समर्थक इस बयान को सांस्कृतिक एकता से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे संविधान के खिलाफ और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बता रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है और इसका राजनीतिक असर क्या होगा।
रामदेव के ‘हिंदू राष्ट्र’ बयान से मचा बवाल! क्या मुस्लिम-ईसाई डरें? कांग्रेस-AIMIM ने दिया करारा जवाब
Hindu Rashtra: योग गुरु रामदेव के एक बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। उन्होंने दावा किया है कि हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे पंथों में गए लोगों के पूर्वज एक ही थे। रामदेव ने साफ कहा कि मुसलमान हों या ईसाई, सभी के पूर्वज हिंदू ही हैं और उन्हें अपनी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद बिहार समेत पूरे देश में ‘हिंदू राष्ट्र’ को लेकर बहस तेज हो गई है।
रामदेव के इस दावे को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी संस्कृति थोपने की कोशिश कर रही है। पतंजलि योग पीठ के सहसंस्थापक और संन्यासी रामदेव के बयान के बाद से ही देश के पंथनिरपेक्ष स्वरूप पर सवाल उठने लगे हैं। वारिस पठान और सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं ने उनके बयान को गलत बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
‘पूर्वज एक हैं, डरने की जरूरत नहीं’: रामदेव
योग गुरु रामदेव ने अपने बयान में कहा कि साल 2009 में उन्हें देवबंद बुलाया गया था। उन्होंने वहां भी अपनी बात रखी थी कि मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन पूर्वज एक ही हैं। रामदेव ने ‘हिंदू राष्ट्र’ के नाम पर किसी को भी डरने की जरूरत न होने की बात कही।
‘हिंदू राष्ट्र के नाम पर किसी को डरने की जरूरत नहीं है, हम सभी के पूर्वज सनातनी हिंदू आर्य वैदिक हैं। डरते क्यों हो। हिंदू राष्ट्र बन जाएगा तो मुसलमानों कहां जाएंगे, कहां जाएंगे, अपने पूर्वजों की परंपराओं को अपनाओ।’
रामदेव ने यह भी कहा कि जो अपने पुरखों का सम्मान नहीं करता, वह किसी का नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों को अपने ऋषि-मुनियों की बात मानने की सलाह दी।
‘अरे जो अपने बाप का नहीं हुआ, वह किसी का नहीं हो सकता। अपने जो पुर-पुरखे हैं, ऋषि मुनि हैं, उनकी बात को मानो। तुम दाढ़ी रखो, मूंछ कटाओ, कैसे भी टोपी पहने, पगड़ी पहनो, चरित्र अपने पूर्वजों जैसा ही रखो। कोई खतरा नहीं है मुसलमानों और इसाइयों को।’
संतों का आदेश मानने की अपील
रामदेव ने मक्का मदीना और वेटिकन सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे वहां से जारी फतवे और आदेशों को लोग मानते हैं, वैसे ही संतों का आदेश भी मानना चाहिए। उन्होंने कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट दोनों को एक ही बात कही।
‘कैथोलिक हों, प्रोटेस्टेंट हों लेकिन वेटिकन सिटी से जो आवाज आती है, लोग कहते हैं कि ये तो हमें मानना है। जो मक्का मदीना और मदरसों से फतवा जारी होता है, उसे लोग मानते हैं। मुल्ला मुसलमान मौलवी जो आदेश जाराी होती है तो वह उसे मानते हैं। ऐसे ही संतों का आदेश मानना चाहिए।’
सलमान खुर्शीद और वारिस पठान का पलटवार
रामदेव के इस बयान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जो ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात करते हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए।
‘घबराने की तो जरूरत नहीं है, लेकिन पूछ तो उनसे लीजिए, जो हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं। उनसे पूछ लेते, बाबा रामदेव से पूछ लेते। उन्होंने ये बात कही है न। मैं कैसे बताऊं इनके मन में क्या है, किस परिप्रेक्ष्य में वो इस बात को बोल रहे हैं?’
खुर्शीद ने सवाल उठाया कि अगर सब सनातनी थे तो फिर इतनी दरारें क्यों डाली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सबको सनातनी मान लेना चाहिए।
वहीं, ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रवक्ता वारिस पठान ने रामदेव के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए पलटवार किया।
‘सुनो बोबा, मुसलमान किसी के बाप से नहीं डरता है। हम संविधान का सम्मान करते हैं। अपनी बात कायदे कानून के दायरे में रखकर करते हैं। हमारी खामोशी को डर की गिनती में मत लो। आप संविधान को मानते नहीं हैं। डरने-घबराने की क्या बात करना।’
वारिस पठान ने साफ कहा कि मुसलमान संविधान का सम्मान करते हैं और अपनी बात कानून के दायरे में रखते हैं। उन्होंने रामदेव को संविधान न मानने वाला बताया। इस पूरे विवाद के बाद देश में धार्मिक पहचान और पंथनिरपेक्षता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, जिस पर आगे भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की उम्मीद है।








