Nepal Protests: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ अब ‘जेन ज़ी’ युवाओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कुछ महीने पहले हिंसक आंदोलनों के बाद बालेन शाह प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन अब राजधानी काठमांडू की सड़कों पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। युवाओं के नेतृत्व में आम लोग उनके कुछ फैसलों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। बालेन शाह के कोर वोटर, उनसे इस कदर नाराज हैं कि लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
बालेन शाह को जिस ‘जेन ज़ी’ आंदोलन ने सत्ता दिलाई थी, तब युवाओं ने उन्हें बदलाव का प्रतीक माना था। उनकी पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी और उन्होंने 100 दिन में बड़े सुधार करने का वादा किया था। हालांकि, युवा अब निराश हो रहे हैं क्योंकि जिस सुधार की उम्मीद थी, उससे बालेन शाह की सरकार कोसों दूर है।






क्या बालेन शाह की कुर्सी खतरे में है? नेपाल में ‘जेन ज़ी’ फिर भड़का, सड़कों पर प्रदर्शन
Nepal Protest: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ ‘जेन ज़ी’ युवाओं का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर आ गया है। कुछ महीने पहले हिंसक आंदोलनों के बाद सत्ता में आए बालेन शाह को युवाओं ने बदलाव का प्रतीक माना था, लेकिन अब राजधानी काठमांडू में लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनके कई फैसलों, खासकर झुग्गी-बस्ती ध्वस्तीकरण अभियान और एक ड्राइवर की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
क्यों भड़का है ‘जेन ज़ी’ का गुस्सा?
नेपाल में झुग्गी-बस्तियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चल रहा है। अप्रैल से अब तक 2000 से अधिक अवैध ढांचों को गिराया जा चुका है। काठमांडू घाटी से लेकर बागमती, मनोहरा और धोबीखोला कॉरिडोर के आसपास बनी झुग्गियां उजाड़ी जा रही हैं। बालेन शाह ने यह काम काठमांडू के मेयर रहते हुए शुरू किया था और अब प्रधानमंत्री बनने के बाद पुलिस और सेना की मदद से इसे और तेज कर दिया है। इस अभियान से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं।
नेपाली समाजसेवी प्रेम कुमार बताते हैं, ‘अगर किसी को उसकी मूल जगह से विस्थापित किया जाता है तो पहले उसे नई जगह पर बसाना चाहिए। नेपाल में अब तक यही होता आया है, कानूनी नैतिकता भी यही कहती है। नेपाल में ज्यादातर परिवारों की झुग्गियां उजाड़ने के बाद उन्हें फिर से बसाया ही नहीं गया। कुछ नागरिकों को सिरफ अस्थाई शिविर नसीब हुआ। जिन्हें अस्थाई शिविर मिले हैं, उन्हें भी जगह खाली करने के लिए परेशान किया जा रहा है।’
12 जुलाई को काठमांडू के मैतिघर में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। उनके हाथों में तख्तियां थीं और वे नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि बालेन शाह को आम जनता पर अत्याचार बंद करना चाहिए।
ड्राइवर की मौत ने सुलगाया बवाल
हाल ही में गणेश नेपाली नाम के एक 25 वर्षीय ड्राइवर की मौत ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है। पासपोर्ट विभाग के बाहर पार्किंग विवाद में पुलिस से बहस के बाद गणेश ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी, जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। घटना के एक वीडियो में आग में झुलसे गणेश को स्ट्रेचर तक नहीं मिलने की बात सामने आई। इससे पहले भी सरकारी नीतियों के खिलाफ दो लोगों ने आत्मदाह किया था, जिससे सरकार के प्रति लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
क्या बालेन शाह की सरकार पर संकट?
बालेन शाह पिछले ‘जेन ज़ी’ आंदोलन के बाद सत्ता में आए थे और उन्होंने 100 दिन में बड़े सुधारों का वादा किया था। हालांकि, युवा अब निराश हैं क्योंकि सुधारों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। नेपाल में विपक्ष का एक बड़ा धड़ा भी बालेन शाह सरकार पर संसदीय नियमों की अनदेखी करने, विपक्षी नेताओं की जल्दबाजी में गिरफ्तारी करने और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान न देने का आरोप लगा रहा है।
एक समय युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहे बालेन शाह के खिलाफ अब वही युवा सड़कों पर हैं। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता एक पुरानी समस्या रही है और अब पूर्ण बहुमत वाली सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। सियासी जानकार आशंका जता रहे हैं कि कहीं बालेन शाह की सरकार का हश्र पिछली अस्थिर सरकारों जैसा न हो जाए, जिससे देश में राजनीतिक संकट और गहरा सकता है।
अवैध झुग्गियां ढहाने से बेघर हुए हजारों परिवार
नेपाली समाजसेवी बताते हैं कि नेपाल में झुग्गी-बस्तियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है। अप्रैल महीने से ही झोपड़ियों को गिराया जा रहा है, जिसमें 2000 से ज्यादा अवैध ढांचों को अब तक ढहाया जा चुका है। काठमांडू घाटी से लेकर बागमती, मनोहरा और धोबीखोला कॉरिडोर के आसपास बनी झुग्गी बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है।
बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब से ही यह काम चल रहा था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने पुलिस और सेना की मदद से इस अभियान को और तेज कर दिया है। इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पुनर्वास के बिना बेदखली से गहराया आक्रोश
कानूनी और नैतिक रूप से, अगर किसी को उसकी मूल जगह से विस्थापित किया जाता है, तो पहले उसे नई जगह पर बसाना चाहिए। नेपाल में अब तक यही होता आया है, लेकिन बालेन शाह की सरकार इस नियम की अनदेखी कर रही है। झुग्गियां उजाड़ने के बाद ज्यादातर परिवारों को फिर से बसाया ही नहीं गया। कुछ नागरिकों को सिर्फ अस्थाई शिविर नसीब हुए हैं, लेकिन उन्हें भी जगह खाली करने के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश है।
12 जुलाई को काठमांडू के मैतिघर में सैकड़ों लोगों ने इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और उन्होंने बालेन शाह से आम जनता पर अत्याचार बंद करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, ‘गरीबों पर अत्याचार बंद करो, मानवाधिकार का सम्मान करो, अवैध गिरफ्तारी बंद करो और झुग्गी वालों को घर दो।’
ड्राइवर गणेश नेपाली की मौत से सुलगा बवाल
हाल ही में गणेश नेपाली नाम के एक 25 वर्षीय ड्राइवर की मौत ने भी जनता के गुस्से को भड़का दिया है। पासपोर्ट विभाग के बाहर पार्किंग विवाद में पुलिस से बहस के बाद गणेश ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी। वह बुरी तरह झुलस गए और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें आग में झुलसे गणेश को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। कुछ दिनों पहले भी सरकारी नीतियों के खिलाफ 2 लोगों ने आत्मदाह किया था, जिससे नई सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।
नेपाल में विपक्ष का एक बड़ा धड़ा आरोप लगा रहा है कि बालेन शाह सरकार संसदीय नियमों को भी नहीं मान रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार संसद की अनदेखी कर रही है, विपक्षी नेताओं की जल्दबाजी में गिरफ्तारी हो रही है और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस बालेन शाह को युवाओं ने अपना हीरो माना था, अब वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर हैं। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता एक पुरानी समस्या है, और अब इस पूर्ण बहुमत वाली सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। सियासी जानकारों को डर है कि कहीं मौजूदा सरकार की विदाई भी पिछली सरकारों की तरह न हो जाए। पढ़िए विस्तार से
नेपाल: जिस युवा ने बनाया PM, वही अब बालेन शाह से मांग रहा इस्तीफा! क्यों भड़का गुस्सा?
Balen Shah: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह, जो कुछ महीने पहले ‘जेन ज़ी’ आंदोलन के बाद सत्ता में आए थे और युवाओं के बीच बदलाव का प्रतीक माने जाते थे, अब उन्हीं के गुस्से का सामना कर रहे हैं। काठमांडू की सड़कों पर एक बार फिर प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, जहां आम लोग और बालेन शाह के कोर वोटर उनके कुछ फैसलों के खिलाफ उतर आए हैं। राजधानी काठमांडू में उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।
बालेन शाह ने 100 दिन में बड़े सुधारों का वादा किया था, लेकिन युवा अब निराश हैं। जिस सुधार की उम्मीद की गई थी, उससे बालेन शाह की सरकार काफी दूर दिख रही है। यह स्थिति नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता की पुरानी समस्या को फिर से उजागर कर रही है।
क्यों भड़का ‘जेन ज़ी’ का गुस्सा?
नेपाली समाजसेवी बताते हैं कि नेपाल में झुग्गी-बस्तियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चल रहा है। अप्रैल से ही झोपड़ियों को गिराया जा रहा है, और अब तक 2000 से अधिक अवैध ढांचों को तोड़ दिया गया है। काठमांडू घाटी से लेकर बागमती, मनोहरा और धोबीखोला कॉरिडोर के आसपास बनी झुग्गी बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है।
बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब से ही यह काम शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने पुलिस और सेना की मदद से इस अभियान को और तेज कर दिया है। इस कार्रवाई के चलते सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं, जिससे बुजुर्ग और बच्चे भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
कानूनी नैतिकता की अनदेखी और गणेश नेपाली की मौत
कानूनी नैतिकता यह कहती है कि यदि किसी व्यक्ति को उसकी मूल जगह से विस्थापित किया जाता है, तो पहले उसे नई जगह पर बसाया जाना चाहिए। नेपाल में अब तक यही होता आया था। हालांकि, बालेन शाह की सरकार ने हजारों परिवारों की झुग्गियां उजाड़ने के बाद उन्हें फिर से नहीं बसाया है।
कुछ नागरिकों को सिर्फ अस्थाई शिविर नसीब हुए हैं, लेकिन उन्हें भी जगह खाली करने के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है। इसी बीच, गणेश नेपाली नाम के 25 वर्षीय ड्राइवर की मौत ने युवाओं के गुस्से को और भड़का दिया है। गणेश ने पासपोर्ट विभाग के बाहर पार्किंग विवाद में पुलिस से बहस के बाद खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी। बुरी तरह झुलसने के बाद उनकी अस्पताल में मौत हो गई। इस घटना के वीडियो में आग में झुलसे गणेश को स्ट्रेचर तक नहीं मिलने का दर्दनाक दृश्य दिखा। कुछ दिनों पहले भी सरकारी नीतियों के खिलाफ 2 लोगों ने आत्मदाह किया था, जिससे सरकार के प्रति लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
काठमांडू के मैतिघर में 12 जुलाई को सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं और उन्होंने नारे लगाए, ‘गरीबों पर अत्याचार बंद करो, मानवाधिकार का सम्मान करो, अवैध गिरफ्तारी बंद करो और झुग्गी वालों को घर दो।’
क्या बालेन शाह की सरकार भी अस्थिरता का शिकार?
नेपाल में विपक्ष का एक बड़ा धड़ा आरोप लगा रहा है कि बालेन शाह सरकार संसदीय नियमों की अनदेखी कर रही है। विपक्षी नेताओं की जल्दबाजी में गिरफ्तारी हो रही है और आम लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस बालेन शाह को युवाओं ने अपना आदर्श माना था, वही युवा अब उनके खिलाफ सड़कों पर हैं।
नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता एक पुरानी समस्या रही है, और अब नई सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। सियासी जानकारों को डर है कि पूर्ण बहुमत वाली यह सरकार भी कहीं पिछली सरकारों की तरह ही अस्थिरता का शिकार न हो जाए। आने वाले समय में बालेन शाह के लिए अपने कोर वोटरों और आम जनता के बीच विश्वास बहाल करना एक बड़ी चुनौती होगी।








