PM Modi Trump: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा और सनसनीखेज आरोप लगाया है। विपक्षी दल का दावा है कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपनी तारीफ करवाने के लिए पैसे दिए थे। कांग्रेस ने यह आरोप अमेरिका में एक लॉबिंग फर्म की फाइलिंग के आधार पर लगाया है, जिसमें भारत सरकार द्वारा फर्म को किए गए भुगतानों का जिक्र है।

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर यह दावा किया है कि जिस लॉबिंग फर्म को भारत सरकार ने काम पर रखा था, उसी ने ट्रंप से पीएम मोदी की तारीफ वाले पोस्ट करवाए। इस आरोप ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है और सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस के आरोप: PM मोदी और ट्रंप कनेक्शन
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल (@INCIndia) पर लिखा कि यह बात अमेरिका में लॉबिंग फर्म की फाइलिंग से सामने आई है। कांग्रेस के मुताबिक भारत सरकार ने जिस लॉबिंग फर्म को हर महीने 75 हजार डॉलर (करीब 62 लाख रुपये) पर रखा था, उसी ने जून 2026 में पीएम मोदी के सबसे लंबे समय तक चयनित प्रधानमंत्री बनने पर ट्रंप की बधाई का पोस्ट करवाया।
कांग्रेस ने कहा, ‘फर्म ट्रंप के करीबी लोगों की है, इसलिए उसकी ट्रंप तक आसान पहुंच थी और इसी वजह से सरकार ने उसे पैसे दिए।’
पार्टी ने यह भी कहा कि जब हॉर्मुज के आसपास भारतीय जहाजों और नाविकों पर हमले हो रहे थे, तब सरकार ‘फर्जी PR’ करवा रही थी। कांग्रेस ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया और कहा कि पैसे देकर झूठी तारीफ करवाने से प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिरी है।
किस आधार पर लगे आरोप? अमेरिकी फर्म की फाइलिंग में क्या?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी लॉबिंग फर्म ‘SHW पार्टनर्स LLC’ ने फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) की नई फाइलिंग में बताया है कि मई-जून में भारत सरकार और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच 8 फोन कॉल करवाई गईं। इस फर्म की अगुवाई ट्रंप के सहयोगी जेसन मिलर करते हैं।
फाइलिंग में इन कॉल का विषय भारत-अमेरिका संबंध बताया गया है और इन्हें फर्म की राजनीतिक गतिविधियों में गिना गया है। FARA के तहत विदेशी पक्षों की ओर से राजनीतिक गतिविधियां करने वाले एजेंट्स को अपने संबंध, गतिविधियां और मिलने वाला पैसा समय-समय पर सार्वजनिक करना होता है।
- मई में हुई बातचीत: फर्म के मुताबिक मई में विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा (23 से 26 मई) से पहले भारतीय पक्ष की बात ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट, डिप्टी NSA माइकल नीडहैम और अंडर सेक्रेटरी जीन लैंज से करवाई गई।
- जून में हुई बातचीत: रुबियो की यात्रा के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर, राष्ट्रपति के नीति सहायक वॉकर बैरेट और व्हाइट हाउस संचार निदेशक स्टीवन चेउंग के साथ कॉल हुईं।
- अन्य कार्यक्रम: फाइलिंग में 23 और 24 मई को रुबियो के साथ दो ‘एंबेसी इवेंट’ का भी जिक्र है।
कितने पैसे में हुआ था ‘PR’? फर्म का काम क्या था?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अप्रैल 2025 में मिलर की फर्म ‘SHW पार्टनर्स LLC’ को नियुक्त किया था। अनुबंध इस साल अप्रैल में एक साल के लिए बढ़ाया गया, लेकिन मिलर के ट्रंप प्रशासन में ‘स्पेशल गवर्नमेंट एंप्लॉयी’ बनने के बाद 23 जून को खत्म कर दिया गया। इस अनुबंध में हर महीने 150,000 डॉलर (करीब 1.25 करोड़ रुपये) का भुगतान तय था।
दस्तावेजों के मुताबिक, फर्म के काम में अमेरिकी सरकार, कांग्रेस, राज्य सरकारों, शिक्षण संस्थानों और थिंक टैंक के सामने नीतिगत मामलों में रणनीतिक सलाह और सरकारी संपर्क में मदद शामिल थी। ट्रंप के दोबारा चुने जाने के बाद भारतीय दूतावास ने ट्रंप के करीबी माने जाने वालों की अगुवाई वाली दो बड़ी लॉबिंग फर्मों को रखा था। दूसरी फर्म ‘मर्करी पब्लिक अफेयर्स’ है, जिसे हर महीने 75,000 डॉलर पर रखा गया। इसकी कोर टीम में ट्रंप की ट्रांजिशन टीम के संचार निदेशक ब्रायन लांजा हैं। ट्रंप की मौजूदा चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स 2024 के अंत तक इस फर्म की रजिस्टर्ड लॉबिस्ट थीं।
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी या सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस ने जहां इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ बताया है, वहीं इस आरोप ने भारत-अमेरिका संबंधों और लॉबिंग के तरीकों पर नई बहस छेड़ दी है।








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