Sonia Gandhi: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने हाल ही में दिवाली से जुड़ी अपनी पुरानी यादें ताजा की हैं, जिसमें उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का 1 सफदरजंग रोड स्थित घर शामिल है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे बेटी प्रियंका गांधी और नातिन मिराया वाड्रा के साथ घर के बगीचे में बातचीत करती नजर आ रही हैं। इस दौरान सोनिया गांधी ने बताया कि कैसे दिवाली पर पूरा घर दीयों की रोशनी से जगमगा उठता था और त्योहार के समय घर में विशेष कश्मीरी व्यंजन बनाए जाते थे। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा कि वे दिवाली की शुरुआती परंपराओं और छोटे-छोटे पलों को फिर से याद कर रही हैं।

हालांकि, इन मीठी यादों के साथ ही सोनिया गांधी ने अपनी आगामी किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ में अपने जीवन के कुछ बेहद दर्दनाक और भावनात्मक पलों का भी खुलासा किया है। यह किताब 10 नवंबर को बाजार में आने वाली है, जिसमें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर उनकी अपनी प्रतिक्रिया और भावनाओं का मार्मिक वर्णन है।
इंदिरा गांधी के घर की दिवाली: दीयों से रोशन हर कोना
सोनिया गांधी ने अपने बचपन की दिवाली याद करते हुए बताया कि सबसे पहले दीये गणेश जी की मूर्ति के पास जलाए जाते थे। उन्होंने उस दौर की बात करते हुए कहा कि तब छोटी रंगीन लाइटें नहीं होती थीं, लेकिन तालाब के चारों ओर, छत पर, बरामदे में और रास्तों पर हर जगह दीये ही दीये होते थे, जो देखने में बहुत खूबसूरत लगते थे। यह दृश्य पूरे घर को एक अलग ही आभा प्रदान करता था।
प्रियंका ने याद किए चांदनी चौक के पटाखे, मिराया से फुलझड़ी की बात
प्रियंका गांधी ने भी अपने पिता राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी के सरकारी आवास पर दिवाली मनाने की यादें साझा कीं। उन्होंने बचपन की एक खास परंपरा बताई कि उनके पिता उन्हें पटाखे खरीदने के लिए चांदनी चौक ले जाते थे। मां और बेटी ने यह भी याद किया कि उन दिनों मौसम बहुत सुहावना रहता था और आसमान एकदम साफ व नीला दिखाई देता था। सोनिया गांधी ने प्रियंका की बेटी मिराया से उस जमाने के पटाखों के उत्साह पर बात करते हुए कहा कि उन्हें खासतौर पर फुलझड़ी जैसी आतिशबाजी बहुत पसंद थी।
जब राजीव को PM बनने को कहा तो गुस्से और पीड़ा से घिर गईं थीं सोनिया
सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ के संपादित अंश ‘द गार्डियन’ में छपे हैं, जिसमें उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के बेहद भावुक पलों का जिक्र किया है। इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने 1 सफदरजंग रोड स्थित आवास पर ही गोली मारी थी। उस समय राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक रैली में थे। उन्हें दिल्ली में हुई गंभीर घटना की सूचना मिली और वे तुरंत दिल्ली लौटे। दोपहर करीब 3.30 बजे पहुंचने के बाद उन्हें सीधे अस्पताल ले जाया गया।
सोनिया गांधी ने अपनी किताब में लिखा है कि अस्पताल में मुलाकात के दौरान वे कुछ पल पति राजीव गांधी के साथ अकेले रहना चाहती थीं। जल्द ही उन्हें समझ आया कि राजीव कुछ ऐसा कहने वाले हैं, जो वह सुनना नहीं चाहती थीं। राजीव गांधी ने उनसे कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने को कहा गया है। सोनिया के मुताबिक, यह सुनकर उन्हें गहरे गुस्से और पीड़ा ने घेर लिया था। उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि कहीं राजीव भी निशाना न बन जाएं।
सोनिया गांधी की यह किताब उनके जीवन के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाएगी, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए थे, खासकर राजनीतिक उथल-पुथल और व्यक्तिगत दुख के क्षणों में उनके मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को। 10 नवंबर को इस किताब के बाजार में आने के बाद कई और खुलासे होने की उम्मीद है।







