Bihar EOU: बिहार में आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बिहार सरकार ने आर्थिक अपराध इकाई (Bihar EOU) के विस्तार के लिए 143 नए पदों के सृजन को अपनी मंजूरी दे दी है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के विभिन्न पद शामिल हैं। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच और उन पर कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय स्तर पर व्यवस्था को मजबूत करना है।

आर्थिक अपराध इकाई का इतिहास और जरूरत
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई का गठन वर्ष 2011 में गृह विभाग के निर्देश पर हुआ था। यह इकाई बिहार पुलिस की नोडल इकाई के रूप में आर्थिक अपराधों और उनसे संबंधित विषयों पर कार्रवाई करती है। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। अपराध के बदलते तरीकों और वित्तीय जांच की बढ़ती जटिलता को देखते हुए, इकाई के मौजूदा ढांचे, कर्मचारियों और संसाधनों में वृद्धि की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
कौन-कौन से पद हुए स्वीकृत?
सरकार ने कुल 143 पदों को स्वीकृति दी है, जो Bihar EOU को नई ताकत देंगे। इनमें पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) का एक और पुलिस अधीक्षक (SP) का एक पद शामिल है। इसके अतिरिक्त, पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के 12 और पुलिस निरीक्षक के 33 पद सृजित किए जाएंगे।
सहायक अवर निरीक्षक के 24, आशु सहायक अवर निरीक्षक के 12 और हवलदार के 12 पद भी स्वीकृत किए गए हैं। इनके साथ 24 चालक सिपाही और 24 सिपाही (कंप्यूटर ऑपरेटर) के पदों को भी मंजूरी मिली है। इन सभी पदों के लिए वेतन स्तर भी तय किया गया है, जैसे डीआईजी के लिए पे लेवल 13ए, एसपी के लिए लेवल 10 और डीएसपी के लिए लेवल 9 निर्धारित है। पुलिस निरीक्षक का वेतन स्तर 7, जबकि सहायक अवर निरीक्षक और आशु सहायक अवर निरीक्षक का लेवल 5 होगा। हवलदार के लिए लेवल 4 और चालक सिपाही तथा कंप्यूटर ऑपरेटर सिपाही के लिए लेवल 3 निर्धारित किया गया है।
बढ़ेंगे क्षेत्रीय कार्यालय, आउटसोर्सिंग से मिलेगी मदद
आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के क्षेत्रीय कार्यालयों के विस्तार और उनके कामकाज को बेहतर बनाने के लिए ये नए पद सृजित किए गए हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आदेश में क्षेत्रीय कार्यालयों के रखरखाव और मेस संचालन जैसे कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग के आधार पर भी पर्याप्त संख्या में कर्मचारी रखने की अनुमति दी गई है। इसके लिए आर्थिक अपराध इकाई के प्रभारी को आवश्यक अधिकार दिए गए हैं।
सरकारी खजाने पर पड़ेगा इतना बोझ
इन 143 नए पदों के सृजन से राज्य सरकार पर हर साल 12 करोड़ 14 लाख 53 हजार 160 रुपये का अनुमानित वित्तीय बोझ आएगा। यह राशि पुलिस विभाग के निर्धारित बजट से खर्च की जाएगी। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, इस प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की बैठक में 28 अक्टूबर 2026 को मंजूरी मिली थी, जिसके बाद पदों के सृजन का स्वीकृति आदेश जारी किया गया। यह विस्तार Economic Crime Bihar पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







