Richa Chadha News: सिनेमाई कैनवास पर कभी तीखी, कभी संजीदा किरदारों से अमिट छाप छोड़ने वाली ऋचा चड्ढा का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं। उनकी अदाकारी ने भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है, जहाँ हर भूमिका में वे अपनी आत्मा उड़ेल देती हैं।
Richa Chadha News: ऋचा चड्ढा: “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” से “हीरामंडी” तक का बेमिसाल सफर और अनसुनी दास्तान






Richa Chadha News: ‘नगमा’ बनकर दिलो-दिमाग पर छा जाने वाली ऋचा चड्ढा का जन्मदिन
भारतीय सिनेमा की प्रतिभाशाली अभिनेत्री ऋचा चड्ढा का जन्मदिन 18 दिसंबर को होता है। उनका जन्म 1986 में अमृतसर में हुआ था। ऋचा के पिता सोमेश चड्ढा एक प्रबंधन फर्म के मालिक हैं, जबकि उनकी माँ, कुसुम लता चड्ढा, दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर हैं, जिन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं और गांधी स्मृति संस्थान के साथ काम किया है। दिल्ली के सरदार पटेल विद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने वाली ऋचा चड्ढा ने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के तौर पर की थी, जिसके बाद वे थिएटर से जुड़ गईं। उन्होंने बैरी जॉन के निर्देशन में कई नाटकों में अभिनय किया।
उनकी फिल्मी यात्रा 2008 में दिबाकर बनर्जी की फिल्म ‘ओए लकी लकी ओए’ में डॉली के सहायक किरदार से शुरू हुई। इसके बाद, वह 2010 में ‘बेनी एंड बबलू’ और कन्नड़ फिल्म ‘निर्दोषी’ में दिखाई दीं। हालांकि, उन्हें सही मायने में पहचान 2012 में अनुराग कश्यप की क्राइम ड्रामा ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 1’ में ‘नगमा खातून’ के यादगार किरदार से मिली। इस भूमिका ने उनके करियर को एक नई दिशा दी और उन्हें ग्यारह अन्य फिल्मों के प्रस्ताव दिलाए। इस फिल्म का प्रीमियर 65वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, और ऋचा ने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ में भी अपने किरदार को दोहराया। इस फिल्म ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (क्रिटिक्स) का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया, साथ ही सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री श्रेणी में भी नामांकन प्राप्त हुआ।
विभिन्न किरदारों में ऋचा का अभिनय कौशल
2013 में ऋचा चड्ढा ने मृगदीप सिंह लांबा की कॉमेडी फिल्म ‘फुकरे’ में तेजतर्रार महिला डॉन ‘भोली पंजाबन’ का किरदार निभाया, जो बेहद लोकप्रिय हुआ। इसी साल, वह अनुराग कश्यप द्वारा निर्मित एंथोलॉजी फिल्म ‘शॉर्ट्स’ के एक सेगमेंट ‘एपिलॉग’ में भी दिखाई दीं। संजय लीला भंसाली की ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ में ‘रसीला’ का सहायक किरदार निभाकर उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए आईआईएफए पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। 2014 में ‘तमंचे’ और 2015 में ‘मैं और चार्ल्स’ जैसी फिल्मों में भी उनकी भूमिकाएँ सराही गईं।
2016 में ऋचा ने सामाजिक-नाटक ‘चॉक एन डस्टर’ में एक पत्रकार और जीवनी पर आधारित फिल्म ‘सरबजीत’ में सुखप्रीत की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए दूसरा फिल्मफेयर नामांकन मिला। 2017 में, वेब-सीरीज़ ‘इनसाइड एज’ में एक संघर्षरत अभिनेत्री की उनकी मुख्य भूमिका को आलोचकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहा। उसी वर्ष, ‘जिया और जिया’ और ‘फुकरे रिटर्न्स’ में ‘भोली पंजाबन’ के रूप में उनकी वापसी हुई। सुधीर मिश्रा के ‘और देवदास’ में ‘पारो’ और पूजा भट्ट के साथ ‘कैबरे’ में भी उन्होंने काम किया। इसके अतिरिक्त, डेविड वोमार्क के इंडो-अमेरिकन प्रोडक्शन ‘लव सोनिया’ में उनका काम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
2019 में ‘सेक्शन 375’ और 2020 में ‘पंगा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें तीसरा फिल्मफेयर नामांकन दिलाया। ‘लाहौर कॉन्फिडेंशियल’ और ‘शकीला’ जैसी फिल्में भी उनके खाते में दर्ज हैं। हाल ही में, 2024 में उन्होंने संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ में ‘लज्जो’ का यादगार किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। ऋचा चड्ढा और अली फजल ने अपनी फिल्म निर्माण कंपनी ‘पुशिंग बटन्स स्टूडियोज़’ भी शुरू की है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
निजी जीवन और संघर्षों से सीखा आत्मविश्वास
निजी जीवन की बात करें तो, ऋचा चड्ढा ने 4 अक्टूबर 2022 को लखनऊ में अभिनेता अली फजल से शादी की। इस साल 16 जुलाई 2024 को उन्होंने अपनी पहली संतान, एक बेटी को जन्म दिया। बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा आज भले ही अपने बेबाक और बिंदास अंदाज के लिए जानी जाती हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे हमेशा से ऐसी नहीं थीं। वे बताती हैं, “आज भले ही लोग मुझे आत्मविश्वासी और निडर कहते हैं, लेकिन पहले हालात बिल्कुल अलग थे। मैं हमेशा से बोल्ड और निडर नहीं थी। अपने शुरुआती दिनों में मैं बहुत सहनशील हुआ करती थी।”
उन्होंने एक घटना साझा करते हुए कहा, “एक दिन सेट पर खड़ी होकर मैंने खुद से पूछा, मैंने ये फिल्म कब साइन की? मैं यहां क्या कर रही हूं? ये आइटम नंबर क्यों कर रही हूं? मैं अंदर से घबरा जाती थी कि ये लोग कौन हैं? मैं क्या कर रही हूं?” ऋचा ने आगे बताया कि उन्हें यह गलतफहमी थी कि शायद इंडस्ट्री का यही तरीका है। उन्होंने कहा, “लोग मेरे लुक्स को ठीक करने की सलाह देते थे। लोग कहते, होंठ ठीक करवा लो, चेहरा ठीक करवाओ, गाना शूट करने से पहले पानी मत पीना। मैं सब मान लेती थी। मैंने अपने शरीर और दिमाग को बहुत तकलीफ दी। तब मैं खुद से कहती थी, मैं बेकार हूं, मैं अच्छी नहीं हूं। बाद में समझ आया कि ये दुनिया है, यहां लोग बस आपको छोटा दिखाने की कोशिश करते हैं।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऋचा चड्ढा का यह सफर हमें सिखाता है कि आत्म-संदेह से निकलकर आत्म-स्वीकृति और आत्मविश्वास की ओर बढ़ना ही सच्ची सफलता है।








