बिहार की सरकार बड़े पैमाने पर शिक्षकों की बहाली करने जा रही है। लेकिन शिक्षक बनने के रास्ते में खुद रोड़ा खड़ा कर रहे हैं। आज पटना के गांधी मैदान में शिक्षक अभ्यर्थियों के उग्र प्रदर्शन और बवाल के बाद सरकार एकदम और सख्ती बरतने के मूड में आ गई है। ऐसे अभ्यर्थी शायद ही शिक्षक बन पाएं। ऐसा सरकार की मंशा से साफ है।
कारण, पटना के गांधी मैदान में शिक्षक नियमावली में डोमिसाइल नीति में बदलाव के विरोध में हाथों में तिरंगा लेकर उग्र प्रदर्शन और नियमावली के जबरदस्त विरोध करने वालों को प्रशासन चिहित करने में अभी से जुट गया है। हो सकता है उसमें से अधिकांश का सपना शिक्षक बनने का अधूरा ही रह जाए।






जो अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं, उनके लिए शिक्षा विभाग ने तत्काल एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जो शिक्षक नियमावली के विरोध में आंदोलन करेंगे उनके ऊपर विभाग विधि सम्मत कार्रवाई करेगा। विभाग ने आंदोलन स्थल की वीडियोग्राफी कराने का तत्काल निर्देश देकर तय कर दिया है कि कार्रवाई बड़ी होने वाली है।
जारी पत्र में यह लिखा गया है कि कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करने वालों की वीडियोग्राफी कराई जाए। ताकि आचार संहिता उल्लंघन के मामले को चिन्हित किया जा सके। ऐसे मामले प्रकाश में आने पर समुचित आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, नीतीश कैबिनेट ने डोमिसाइल नीति को बदला है। इसके बाद ही अभ्यर्थियों ने सरकार को 72 घंटे का समय दिया था। इसमें कहा था कि डोमिसाइल नीति को हटाकर भर्ती करवाएं। यह डेडलाइन अब समाप्त हो चुकी है।
बिहार सरकार ने कहा था कि बाहर के अभ्यर्थी भी 1.8 लाख टीचर भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। बिहार के छात्रों को इसी बात से आपत्ति है। दूसरे राज्यों के लोगों को क्यों वैकेंसी दी जा रही है। वैसे, जब से नई शिक्षक नियमावली आई है तब से कई संशोधन हो चुके हैं।








