किरतपुर, देशज टाइम्स। किरतपुर पंचायत के वार्ड 9 के महादलित चौपाल टोल के श्याम चौपाल, रंजीत कुमार, झगड़ुआ वार्ड बारह के गरीब नंदन पासवान, वार्ड चार के मो. इकबाल, हाजी मोहम्मद जकुल्लाह की मुसीबत यह नहीं है कि कमला बलान की उपधारा गेहुंआ उफना गई है। बाढ़ तो इन लोगों की नियति है। मगर, इनकी परेशानी जहां है वहां की चिंता इन्हें खाए जा रही है। दरभंगा का किरतपुर और झगड़ुआ, आफत आसमानी भी है, जमीनी भी, सिस्टम पर गौर करे कौन, फरमाए कौन?
दरअसल, इनकी परेशानी उस विपदा से नहीं जुड़ा है जिसे बाढ़ कहते हैं। बाढ़ तो यह झेलते ही रहें हैं। फिर आएगा सैलाब तो झेलेंगे। इनकी परेशानी वहां से जहां सिस्टम इनकी सुनता नहीं। प्रशासन इनकी बातों पर गौर नहीं फरमाता। ऐसे में, इनका गुस्सा स्वभाविक है।






मो.इकबाल कहते हैं, हम लोगों की राशन झगरूआ गांव से आता है। लेकिन इस दो सौ मीटर में सड़क नहीं है। हर साल हम लोग इस परेशानी को झेलते हैं।
गरीब नंदन पासवान फिर इकबाल की बातों से सहमत हैं। कहते हैं, इससे काफी परेशानी होती है। सड़क नहीं होने के कारण हमलोग राशन समय पर नहीं उठा पाते हैं। हर साल फर्जी तरीके से हमारे साथ फर्जीवाड़ा होता है। हर साल बाढ़ आती ही है। इसी का बहना बनाकर स्थानीय प्रशासन भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।
जानकारी के अनुसार, इन दिनों किरतपुर प्रखंड क्षेत्र से निकलने वाली नदी कमला बलान की उपधारा गेहुंआ नदी उफनाई हुईं हैं। इससे किरतपुर, झगरूआ और कुबौल ढंगा पंचायतों के निचले हिस्से में पानी फैल गया है।
वहीं, झगरूआ पंचायत से किरतपुर पंचायत को जोड़ने वाली मुख्य सड़क झगरूआ रन-परती के समीप करीब दो सौ फीट में तीन से चार फीट पानी बह रहा है। इससे आवागमन मुश्किल है। हर साल इसी जगह सड़क पर पानी बहने से दोनों पंचायत के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। इसी वजह से इस बार भी लोग जान जोखिम में डालकर पानी में पैदल चलने को मजबूर हैं। झगरूआ पुनर्वास महादलित टोल के लोग इससे हलकान बने हैं।
ग्रामीण बताते हैं, कई बार सड़क बनाने के लिए विभागीय अधिकारियों को लिखा गया, मगर सुने कौन, सुनाया किसे जाए। वहीं, सीओ आशुतोष सन्नी का कहना है, बारिश का पानी है। सड़कों पर बाढ़ नहीं आई है। बाढ़ पूर्व सारी तैयारी हमारे पास है।








