मुख्य बातें: ‘भोला के देखे ले बेकल भेल जियरा, ममता के मूर्ति अहीं जननी जन भार हरू, गाम मे लगैया दुर्गा मेला यौ’ जैसी रचना ने बना डाला अमर
झंझारपुर, मधुबनी देशज टाइम्स। मिथिलांचल के सुप्रसिद्ध गीतकार गायक शंभु कुमार कर्ण उपाख्य शम्भु सौरभ का बीते शुक्रवार की देर रात अनुमंडल से सटे बैका बिशनपुर गांव स्थित आवास पर निधन हो गया। वे लगभग उन्यासी वर्ष के थे।






उन्होंने अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र, तीन पुत्री एवं नाति-नातिन से भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं। मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र रितेश कुमार कर्ण ने दी। उनके काफी करीबी रहे साहित्यकार डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि दिवंगत शंभु सौरभ हिंदी, संस्कृत, मैथिली एवं बज्जिका साहित्य के अध्येता के साथ ही राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि थे।
डॉ. शर्मा ने बताया कि देश के कई नामचीन साहित्यिक संस्थाओं की ओर से सम्मानित व्यक्ति थे। उन्हें खड़ौआ गांव में महाकवि पंडित लालदास जयंती समारोह समिति की ओर से महाकवि पंडित लालदास साहित्य गौरव सम्मान 2020, संत केशव दास विभूषण सम्मान, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन सम्मान इंडिया इंटरनेशनल भवन दिल्ली, राष्ट्रभाषा साहित्य सम्मान कानपुर, हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान इलाहाबाद, बाल साहित्य सम्मान गैरसैण उत्तराखंड, गोनू झा श्री सम्मान भरवाड़ा, साहित्य काव्य गंगा सम्मान वाराणसी, मिथिला विद्यापति सम्मान प्रयागराज, मैथिल समाज वाराणसी द्वारा मिथिला रत्न सम्मान के अलावा दर्जनों सम्मान से नवाजे जा चुके हैं।
दिवंगत सौरभ जी के भतीजे राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रसिद्ध चित्रकार दास पुष्कर ने बताया कि उनकी कालजयी रचनाओं में ‘जगदंबा घर मे दियरा बारि अइली हे, भोला के देखे ले बेकल भेल जियरा’ को बिहार स्वर कोकिला पद्मश्री शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज देकर अमर बना दिया।
वहीं, गायक पं.कुंज बिहारी मिश्र ने ‘पूजा के हेतु शंकर आयल छी हम पुजारी, गायक रामबाबू झा ने ‘ममता के मूर्ति अहीं जननी जन भार हरू’, गायक दिलीप दरभंगिया ने ‘गाम मे लगैया दुर्गा मेला यौ अलबेला पिया एबे करब’ जैसी कई रचनाओं को अपने सुरों में ढाला है। जो आज भी मिथिलांचल के प्रिय गीतों में शुमार है।
उनकी रचनाओं को अपने मिथिलांचल के अलावा नेपाल के गायकों ने भी अपने स्वर में पिरोया है। इसके अलावा उनकी सैकड़ों प्रसिद्ध रचनाएं हैं। जो विभिन्न पुस्तकों में प्रकाशित हो चुका है। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में गीतरस-1971, चकोरी-1972, रसगुल्ला 1977, शिवदर्शन-1978, हरिदर्शन- 1978-79, कीर्तनमाला-1985, रमन – चमन-1988, बज्जिका में अनुदित पोथी मेघदूत शामिल है।
इसके अलावा गायक पं.कुंज बिहारी मिश्र के संगीत निर्देशन में वर्ष 1999 में रसकुल्ला कैसेट बना था। जिसके सभी गाने आज भी काफी लोकप्रिय है। चित्रकार श्री पुष्कर ने बताया कि उनकी लिखी हिंदी की गीत-गजल, मैथिली भाषा में अनुदित मेघदूत पुस्तक के अलावा कई रचनाएं अप्रकाशित है।
बज्जिका के जाने माने साहित्यकार ओमकार नाथ सिंह ने बताया कि उनके सह सम्पादन में ‘मिथिला भूमि’ एवं ‘बज्जिका वैभव’ पत्रिका का प्रकाशन हो चुका है। उन्होंने बताया कि शम्भु सौरभ आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से जुड़े थे। आकाशवाणी से उनके दर्जनों कविता व गीत का प्रसारण होता रहा है।
वे जीवनपर्यंत विभिन्न पत्रिका के लिए कविता, गीत व गजल का लेखन करते रहे। उनके निधन पर सांसद आरपी मंडल, मंत्री संजय झा,मंत्री शीला मंडल, विधायक भारत भूषण, विधायक नीतीश मिश्रा, विधान पार्षद अम्बिका गुलाब यादव,जिप अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव, पूर्व प्रमुख अनुप कश्यप, पूर्व मुखिया भागीरथ दास,देवानंद झा,अजय कुमार दास,अनिल झा,सुनील कुमार दास,अमरनाथ झा, काशीनाथ झा किरण,डॉ अनिल ठाकुर आदि लोगों ने दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है।








