फुलपरास, मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। फुलपरास में 172 सेविका-सहायिकाओं की बहाली के बहाली के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें सभी सेविका-सहायिकाओं से बहाली के नाम पर पचास हजार की राशि लेकर डकारने व उन्हें यूर्निफार्म देकर फर्जी तरीके से बैठक और कार्यक्रम आयोजित कर सरकार की बाल विकास परियोजना के नाम पर बड़ा धोखाधड़ी की गई है। मगर, इसका भंडाफूट गया है।
जानकारी के अनुसार, यह बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा फुलपरास अनुमंडल के अलावे झंझारपुर अनुमंडल के मधेपुर प्रखंड के तीन पंचायतों में भी बहाली के नाम पर खेला गया है। इनमें दारह, तारडीहा, मटरस पंचायत शामिल है। हालांकि, शनिवार को अवैध रूप से संचालित प्रगतिवाद बाल विकास योजना कार्यालय को एसडीएम ने सील करते हुए आगे की तहकीकात का जिम्मा सौंप दिया है।






जो जानकारी छनकर आ रही है उसके मुताबिक, इस जांच और तककीकात के बाद बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और महिलाओं से अवैध उगाही का मामला सामने आएगा। जहां, फुलपरास के किराए के मकान में संचालित संस्था की ओर से अवैध उगाही कर सीधे सेविका और सहायिका में बहाली कर सभी पंचायतों में आंगनवाड़ी केंद्र खोलने की बात कागजी तौर पर सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, फुलपरास अनुमंडल मुख्यालय के केंद्र कहे जाने वाले लोहिया चौक के निकट किराये के मकान में अवैध रूप से संचालित प्रगतिवाद बाल विकास योजना कार्यालय को एसडीएम अभिषेक कुमार ने आज शनिवार को सील कर दिया है।
साथ ही, एसडीएम ने संस्था की ओर से अनुमंडल क्षेत्र में खोले गए केंद्रों के बारे मे संबंधित क्षेत्र के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और पर्यवेक्षिकाओं से जानकारी कराने का निर्देश दिया है।
इस संबंध में एसडीएम श्री कुमार ने बताया कि इस कार्यालय की ओर से बहाली के नाम पर पचास हजार रुपये लेकर अवैध रूप से सीधे आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं की बहाली कर अनुमंडल के चारों प्रखंडों के अलावा झंझारपुर अनुमंडल के मधेपुर प्रखंड सहित कुल 172 आंगनबाड़ी केंद्र संचालन की शिकायतें मिलीं।
शिकायत मिलने पर एसडीएम की ओर से किराए के मकान में संचालित कार्यालय पहुंचकर सभी बिंदुओं पर जांच की गई। संचालक से सबंधित विभागीय आदेश, विभिन्न साक्ष्य व कागजात मांगे गए, जो कार्यालय की ओर से प्रस्तुत नहीं किया गया।
कागजात नहीं मिलने के बाद एसडीएम ने तत्काल अवैध रूप से चल रहे उक्त प्रगतिवाद बाल विकास योजना कार्यालय को सील कर दिया। वहीं, संस्था के बारे में विभिन्न बिंदुओं से विस्तृत जांच जारी है। गलत पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सह फुलपरास बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कविता कुमारी ने बताया कि मेरे संज्ञान में भी आया है। पर्यवेक्षिका को भी दी है कि वह पूरी जानकारी लेंगे कि यह सेंटर कहां कहां संचालित है। विभाग कहीं से किसी भी बहाली में संलिप्त नहीं है। यह फर्जी संस्था की ओर से किया गया है जो बाल विकास परियोजना विभाग को बदनाम करने की साजिश है।
इधर, अवैध रूप से चल रहे प्रगतिवाद बाल विकास योजना कार्यालय सील होने से क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।








