दरभंगा, देशज टाइम्स। CM Science College… Darbhanga में इससे बड़ा नाम ना कोई है, ना ही फिलहाल शिक्षा जगत में कोई होगा। छात्रों की लालसा होती है इस कॉलेज में पढ़ें। कारण, यहां की योग्यता के अपने मायने हैं। लेकिन, वो योग्यता ही क्या जो खुद में योग्य ना हो…कॉलेज की सूरत थोड़ी सी बारिश में ही आज पानी-पानी है।
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कॉपी मूल्यांकन करें या खुद को ठौर दें शिक्षा कर्मी यह समझ नहीं आ रहा। कॉलेज के बाहर जमे अतिक्रमणकारी नालों को अपने में समेटे बैठे हैं। हालात, इतने विकट हैं, पूरा कॉलेज प्रबंधन हलकान बना बैठा है। मगर सुने कौन? एक बार फिर हुई कुछ घंटों की बारिश ने शनिवार को फिर से दरभंगा नगर निगम के सफाई अभियान की पोल खोल कर रख दी है।






इस बारिश ने कुछ घंटों में ही ऐसा कहर बरपाया कि ना सिर्फ शहर के विभिन्न इलाके जलमग्न हो गए, बल्कि स्वयं नगर निगम कार्यालय भी इसमें डूबता नजर आया और उसके दावों को इस बेमौसमी बरसात ने कुछ घंटों में ही धो डाला।
सबसे बदतर स्थिति नगर निगम कार्यालय से सटे सीएम साइंस कॉलेज की एक बार फिर हो गई। यहां फिलहाल स्नातक प्रथम खंड की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। इसमें शनिवार को मूल्यांकन कार्य में लगे सैंकड़ों शिक्षकों एवं काॅलेज के छात्र-छात्राओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
शुक्रवार की देर रात हुई बारिश से परिसर में घुटने भर पानी जमा हो गया है। और, इसने महाविद्यालय प्रशासन की चिंता की लकीरें काफी बढ़ा दी। महाविद्यालय के विभिन्न कार्यालयों में पानी घुस गया, जिससे कार्यालय काफी अस्त-व्यस्त हो गया।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने बताया कि नगर निगम एवं जिला प्रशासन से महाविद्यालय परिसर में लगातार हो रहे जलजमाव के निदान करने का बार-बार अनुरोध करने के बाद भी स्थिति जस का तस बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालय परिसर के चारों ओर स्थित नालों को अनधिकृत रूप से अतिक्रमित कर लिए जाने के कारण महाविद्यालय को करीब सालों भर जलजमाव की अनचाही समस्या से जूझना पड़ता है। नगर निगम एवं जिला प्रशासन से इस बाबत बार-बार अनुरोध करने के बाद भी नतीजा अब तक शून्य हैं।
उन्होंने कहा कि नालों के समुचित सफाई के मामले में नगर निगम की यदि आगे भी ऐसी ही उदासीनता बनी रही, तो आगे की स्थिति और भी भयावह होने वाली है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमित नालों के निरीक्षण का कार्य बार-बार अनुरोध करने के बाद भी अधिकारी सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। जिसका परिणाम है कि महाविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्रों को अनचाहे जलजमाव की समस्या से बार-बार जूझना पड़ता है।








