Amavasya 2026: भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है। यह दिन पितरों के स्मरण और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमावस्या 2026: वर्ष भर की तिथियां और महत्व
अमावस्या 2026 का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में प्रत्येक अमावस्या का अपना एक विशिष्ट महत्व है। इस पवित्र तिथि पर पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के कार्य करने से पितरों को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। वर्ष 2026 में कब-कब पड़ रही हैं ये महत्वपूर्ण अमावस्या तिथियां, आइए विस्तार से जानते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
2026 में अमावस्या तिथियों की सूची
| माह | अमावस्या तिथि | महत्व |
|---|---|---|
| जनवरी | 17 जनवरी 2026, शनिवार | पौष अमावस्या, शनि अमावस्या |
| फरवरी | 15 फरवरी 2026, रविवार | माघ अमावस्या, मौनी अमावस्या |
| मार्च | 17 मार्च 2026, मंगलवार | फाल्गुन अमावस्या |
| अप्रैल | 15 अप्रैल 2026, बुधवार | चैत्र अमावस्या |
| मई | 15 मई 2026, शुक्रवार | वैशाख अमावस्या, वट सावित्री व्रत |
| जून | 13 जून 2026, शनिवार | ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती |
| जुलाई | 13 जुलाई 2026, सोमवार | आषाढ़ अमावस्या |
| अगस्त | 11 अगस्त 2026, मंगलवार | श्रावण अमावस्या, हरियाली अमावस्या |
| सितंबर | 10 सितंबर 2026, गुरुवार | भाद्रपद अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या |
| अक्टूबर | 09 अक्टूबर 2026, शुक्रवार | अश्विन अमावस्या, सर्व पितृ अमावस्या |
| नवंबर | 08 नवंबर 2026, रविवार | कार्तिक अमावस्या, दीपावली |
| दिसंबर | 08 दिसंबर 2026, मंगलवार | मार्गशीर्ष अमावस्या |
अमावस्या पर पूजा विधि और नियम
- प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य दें और ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें।
- पितरों के निमित्त तर्पण करें और श्राद्ध कर्म संपन्न करें।
- ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं तथा सामर्थ्य अनुसार दान करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- पीपल के वृक्ष की पूजा करें और दीपक जलाएं।
- शाम के समय घर के मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं।
अमावस्या के दिन जपें यह विशेष मंत्र
ॐ सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः।
ॐ पितृभ्यो नमः।
अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व और उपाय
अमावस्या तिथि को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान और दान-पुण्य विशेष फलदायी होते हैं। खासकर, इस दिन पितृ तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह तिथि कालसर्प दोष निवारण के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। अमावस्या के दिन भगवान शिव और विष्णु की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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