spot_img

नए लेबर कोड से IT कंपनियों को अरबों का झटका: Q3 नतीजों में दिखा बड़ा असर!

spot_img
- Advertisement -

New Labor Code: देश की प्रमुख आईटी कंपनियों TCS, इंफोसिस और HCLTech के लिए तीसरी तिमाही के नतीजे सिर्फ संख्याओं का खेल नहीं रहे, बल्कि एक बड़े बदलाव की गूंज भी इनमें सुनाई दी। हाल ही में लागू हुए नए श्रम कानूनों ने इन टेक दिग्गजों के मुनाफे पर करोड़ों का सीधा असर डाला है, जिससे उद्योग जगत में एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बेहतर भविष्य की नींव रखेगा या कंपनियों के लिए वित्तीय चुनौतियां बढ़ाएगा।

- Advertisement -

नए लेबर कोड से IT कंपनियों को अरबों का झटका: Q3 नतीजों में दिखा बड़ा असर!

वित्त वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही में, जो 31 दिसंबर को समाप्त हुई, देश की तीन सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनियों को नए श्रम संहिताओं के कारण बड़े वित्तीय झटके का सामना करना पड़ा है। इस अवधि में, इन कंपनियों को कुल 4,373 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिससे उनके तिमाही मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई।

- Advertisement -

नए लेबर कोड का कंपनियों पर वित्तीय बोझ

14 जनवरी को इंफोसिस ने अपनी दिसंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा करते हुए 1289 करोड़ रुपये के “असाधारण शुल्क” (exceptional charge) का उल्लेख किया। यह अतिरिक्त खर्च नए लेबर कोड के प्रावधानों के तहत ग्रेच्युटी और छुट्टियों की देनदारियों (leave liability) में वृद्धि के कारण हुआ है। इसी तरह, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने 12 जनवरी को 2128 करोड़ रुपये और HCLTech ने 956 करोड़ रुपये के विशेष खर्च का कारण नए श्रम कानूनों को बताया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

इन चुनौतियों के बावजूद, TCS Q3 में अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को 25.2 प्रतिशत पर बनाए रखने में सफल रही। HCLTech ने भी अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को बढ़ाकर 18.6 प्रतिशत कर लिया। हालांकि, इंफोसिस ने Q3 में 18.4 प्रतिशत का ऑपरेटिंग मार्जिन दर्ज किया, जो पिछली तिमाही के 21 प्रतिशत से काफी कम है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यदि नए श्रम कानूनों को लागू करने से जुड़ी लागतें नहीं होतीं, तो उनका समायोजित मार्जिन लगभग 21.2 प्रतिशत होता।

ऑपरेटिंग मार्जिन क्या है और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

ऑपरेटिंग मार्जिन किसी कंपनी के मुख्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले लाभ को मापता है। इसमें कर्मचारियों के वेतन से लेकर कच्चे माल पर आने वाले खर्च तक सभी परिचालन लागतें शामिल होती हैं। यह कर चुकाने से पहले का लाभ होता है और दर्शाता है कि कंपनी अपनी हर 1 रुपये की बिक्री पर मुख्य व्यवसाय से कितना लाभ कमा रही है। उच्च ऑपरेटिंग मार्जिन का मतलब है कि कंपनी अपने मुख्य व्यवसाय से अधिक पैसा कमा रही है, जिसका उपयोग वह कर्ज चुकाने, लाभांश देने या कंपनी के विकास के लिए कर सकती है।

तीनों कंपनियों ने उम्मीद जताई है कि आगामी तिमाहियों में नए लेबर कोड का मार्जिन पर बहुत कम असर पड़ेगा। कंपनी प्रबंधन को इन बदलावों के कारण लगभग 10-20 बेसिस पॉइंट्स के मामूली प्रभाव की उम्मीद है।

बदलती कार्य संस्कृति: नए श्रम कानूनों का प्रभाव

हाल ही में प्रभावी हुए नए लेबर कोड ने भारत के कार्यबल के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की नींव रखी है। इसके तहत, सरकार ने श्रम से जुड़े 29 मौजूदा कानूनों को खत्म कर दिया है और उनके स्थान पर चार नए श्रम सुधार कानून लागू किए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करना और एक अधिक संतुलित कार्य वातावरण बनाना है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

इन चार नए लेबर कोड ने विशेष रूप से आईटी/आईटीईएस (IT/ITes) सेक्टर के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अनिवार्य अपॉइंटमेंट लेटर: सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा।
  • उच्च बेसिक सैलरी: बेसिक सैलरी में वृद्धि, जिसका सीधा असर भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा पर पड़ेगा।
  • गारंटीड सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स: काम के घंटों के आधार पर सुनिश्चित सामाजिक सुरक्षा लाभ।
  • महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट: आईटी कंपनियों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की सुविधा दी गई है, जिससे उन्हें ज्यादा पैसा कमाने के अवसर मिलें और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिले।

ये बदलाव न केवल कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेंगे, बल्कि कंपनियों को भी एक अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत कार्यबल प्रबंधन प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, इन बदलावों से उत्पन्न होने वाली लागतें कंपनियों के लिए शुरुआती चुनौती बनी हुई हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह भारतीय कार्यबल के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

भागलपुर में बाढ़ का खतरा! ब्रह्मोत्तर बांध पर युद्धस्तर पर काम, बड़ी चेतावनी | अतिक्रमण बना बड़ी चुनौती-पिछली बार भी हुई थी भारी मशक्कत

Bhagalpur Flood Preparation: भारी बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच भागलपुर के गोपालपुर में ब्रह्मोत्तर बांध में हुए कटाव के बाद जलसंसाधन विभाग ने मरम्मत कार्य शुरू किया है। सीओ रौशन कुम#BhagalpurNews,#BiharFlood,#DamSafety

भागलपुर: 30 लाख के नाले में ‘पानी’ का खेल! घुटने भर पानी में बन रहा था मसाला, ग्रामीणों ने काम रुकवाया

Bhagalpur Nathnagar Nala: भागलपुर के नाथनगर में 30 लाख की लागत से बन रहे मुख्य नाले के निर्माण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ठेकेदार घुटने भर पानी में ही मसाला तैयार कर रहा था, जिससे नार#BhagalpurNews,#NathnagarNigam,#BiharCorruption

दरभंगा के सबसे पुराने लॉ कॉलेज पर आया बड़ा संकट! 320 छात्रों का भविष्य दांव पर, जानिए क्या है पूरा मामला

Bihar Law College: दरभंगा के ऐतिहासिक सीएम लॉ कॉलेज पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। मानकों की कमी से 320 छात्रों का भविष्य अधर में, अधिवक्ता सं#BiharLawCollege,#DarbhangaNews,#LNMU

बिहार के पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार! जुड़ेंगे अमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर की कनेक्टिविटी| पढ़िए – संरेखण औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली,...

Bihar Expressway: बिहार सरकार ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को एक अहम प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत वाराणसी-कोलकाता और अमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से प्रमुख पर्यटन स्थलों#BiharExpressway,#BiharTourism,#RoadConnectivity