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विप्रो पर 250+ उम्मीदवारों को अधर में लटकाने का आरोप: IT Hiring पर उठे सवाल

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IT Hiring: देश के प्रमुख आईटी सेवा प्रदाताओं में से एक विप्रो लिमिटेड पर 250 से अधिक नव-चयनित कर्मचारियों को काम पर न रखने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नौकरी की अनिश्चितता को उजागर करता है, जहां हजारों युवा नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। कर्मचारी यूनियन एनआईटीईएस ने श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिससे यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

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# विप्रो पर 250+ उम्मीदवारों को अधर में लटकाने का आरोप: IT Hiring पर उठे सवाल

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सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के कर्मचारियों की संस्था एनआईटीईएस (NITES) ने श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को एक लिखित शिकायत सौंपी है। इस शिकायत में विप्रो लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि कंपनी ने 250 से अधिक नव-चयनित कर्मचारियों को महीनों बीत जाने के बाद भी नौकरी पर नहीं रखा है। इन उम्मीदवारों का चयन विप्रो के प्रतिष्ठित ‘टर्बो’ और ‘नेक्स्टजेन टैलेंट हायरिंग’ कार्यक्रमों के तहत हुआ था। इन्हें मई 2025 में पद, वेतन और जॉइनिंग प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी के साथ आशय पत्र (Letter of Intent) जारी किए गए थे। यह घटनाक्रम आईटी सेक्टर में रोजगार की मौजूदा चुनौतियों को दर्शाता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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## IT Hiring अनिश्चितता: क्या हैं एनआईटीईएस के आरोप?

एनआईटीईएस के अनुसार, कई चयनित उम्मीदवारों को विप्रो की ओर से औपचारिक ऑनबोर्डिंग ईमेल भी भेजे गए थे। इन ईमेल्स में जॉइनिंग की तय तारीख, कार्यस्थल और आवश्यक दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लेख था। हालांकि, सभी शर्तों को पूरा करने और बैकग्राउंड सत्यापन प्रक्रिया सफल होने के बावजूद, कंपनी ने उम्मीदवारों को निर्धारित समय पर काम पर नहीं बुलाया। इस अप्रत्याशित देरी ने सैकड़ों युवाओं के करियर को अधर में लटका दिया है।

संगठन का कहना है कि उम्मीदवारों को लंबे समय तक अनिश्चितता के माहौल में छोड़ दिया गया। कंपनी की ओर से उन्हें अक्सर सामान्य और अस्पष्ट जवाब मिले, और व्याख्याएं लगातार बदलती रहीं। सबसे दुखद पहलू यह है कि कई उम्मीदवार कैंपस प्लेसमेंट नियमों के कारण अन्य नौकरी के अवसरों को भी नहीं अपना सके, जबकि कुछ ने विप्रो के ऑफर के चलते दूसरी नौकरियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए थे। इस स्थिति ने उनके भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

एनआईटीईएस के मुताबिक, कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण कई उम्मीदवार छह से आठ महीने तक बेरोजगार रहे। इस लंबी अवधि की बेरोजगारी ने न केवल उन पर अत्यधिक वित्तीय दबाव डाला है, बल्कि मानसिक तनाव भी पैदा किया है। संस्था ने केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि विप्रो से जवाब तलब किया जा सके और सभी प्रभावित उम्मीदवारों को जॉइनिंग की स्पष्ट तारीख या देरी का ठोस कारण लिखित रूप में प्रदान किया जाए।

## आईटी उद्योग में पारदर्शिता की मांग

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी अनुचित प्रथाएं पूरे आईटी उद्योग में सामान्य हो सकती हैं, जो अंततः भारत के युवा कार्यबल को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाएगी। यह घटनाक्रम आईटी कंपनियों द्वारा की जाने वाली भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि कंपनियां अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें और स्पष्ट संचार बनाए रखें। यह मामला न केवल विप्रो के लिए बल्कि पूरे आईटी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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