Holi 2026 Date: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली, रंगों और उमंगों का पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में, यह पावन पर्व कब और किस शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा, तथा चंद्र ग्रहण का इस पर क्या प्रभाव होगा, आइए जानते हैं।
Holi 2026 Date: जानें रंगों के इस महापर्व की तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्र ग्रहण का प्रभाव
Holi 2026 Date: पावन पर्व की तैयारी और धार्मिक महत्व
वर्ष 2026 में, रंगों का यह पावन पर्व दो प्रमुख तिथियों में विभाजित होगा। होलिका दहन बुधवार, 4 मार्च 2026 को किया जाएगा, जबकि रंगों वाली धुलेंडी या रंग पंचमी गुरुवार, 5 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है, जिस पर होलिका दहन का अनुष्ठान संपन्न होता है। यह पर्व सत्य और धर्म की विजय का उद्घोष करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शुभ मुहूर्त: होलिका दहन 2026
होलिका दहन सदैव भद्रा रहित काल में ही किया जाता है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में होलिका दहन के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:
| पर्व | तिथि | समय |
|---|---|---|
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 3 मार्च 2026, मंगलवार | सुबह 09:37 बजे से |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 4 मार्च 2026, बुधवार | सुबह 08:35 बजे तक |
| होलिका दहन शुभ मुहूर्त | 4 मार्च 2026, बुधवार | शाम 06:23 बजे से रात 08:35 बजे तक |
| अवधि | – | 02 घंटे 12 मिनट |
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन से पूर्व विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत आवश्यक है। यह पूजा नकारात्मक शक्तियों को दूर कर घर में सुख-समृद्धि लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- होली से कुछ दिन पूर्व होलिका के लिए लकड़ियां, उपले और घास एकत्रित करें।
- होलिका दहन के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- होलिका स्थल पर जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं का स्मरण करें।
- गाय के गोबर से बनी होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा स्थापित करें।
- जल, रोली, चावल, फूल, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, नारियल और पांच प्रकार के अनाज से पूजा करें।
- कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार लपेटें।
- अंत में जल अर्पित करें और अपनी मनोकामनाएं मांगें।
रंगों की होली का उल्लास
होलिका दहन के अगले दिन, यानी 5 मार्च 2026, गुरुवार को रंगों की होली खेली जाएगी। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर, मिठाइयां खिलाकर और गले मिलकर इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। यह दिन प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है, जब सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ खुशियां मनाते हैं।
चंद्र ग्रहण और होली 2026 का प्रभाव
कई बार त्योहारों के दौरान चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण का योग बन जाता है। वर्ष 2026 में होली के आसपास किसी भी बड़े चंद्र ग्रहण का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है, जो भारत में दृश्यमान हो या जिसका पर्व पर नकारात्मक असर पड़े। इसलिए श्रद्धालु बिना किसी चिंता के पूरे उत्साह के साथ होली मना सकते हैं।
होली का पौराणिक महत्व
होली का पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका की कहानी से जुड़ा है। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को वरदान प्राप्त होने के कारण प्रहलाद को अग्नि में भस्म करने का आदेश दिया, परंतु भगवान की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं भस्म हो गईं। यह कथा धर्म, भक्ति और विश्वास की विजय का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
होली के पावन मंत्र
होलिका दहन के समय इस मंत्र का जाप करने से सभी भय और नकारात्मकता दूर होती है:
अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।।
निष्कर्ष और उपाय
होली का यह महापर्व हमें प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश देता है। इस दिन अहंकार और बुराइयों को अग्नि में भस्म कर नए और उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं। होली के दिन गरीबों को दान करना और बड़ों का आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह त्योहार आपके जीवन में नई ऊर्जा और खुशियां लेकर आए, यही हमारी कामना है।
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