Benipur Court Order: बिहार में न्यायपालिका ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। दरभंगा जिले के बेनीपुर स्थित अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-I, रौशन कुमार छापोलिया की अदालत ने 13 साल की एक बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस द्वारा दायर ‘तथ्य की भूल’ वाले अंतिम प्रतिवेदन को सिरे से खारिज कर दिया है। 23 जून 2026 को पारित इस महत्वपूर्ण आदेश में कोर्ट ने दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को 90 दिनों के भीतर एक अलग अनुसंधानक नियुक्त कर नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने का सख्त निर्देश दिया है। यह फैसला पुलिस की ‘बहरा कर देने वाली चुप्पी’ करार देते हुए न्याय की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
पुलिस की जांच पर कोर्ट के तीखे सवाल
मामला बहेरा थाना क्षेत्र के हनुमान नगर बेनीपुर, वार्ड-25 का है, जहां 13 दिसंबर 2025 को चंद्रमुनि देवी की 13 वर्षीय बेटी घर में गमछे के फंदे से लटकी मिली थी। चंद्रमुनि देवी ने एफआईआर (बहेरा थाना कांड संख्या 514/25) में आरोप लगाया था कि जमीन विवाद के कारण गांव की संजू देवी, शीला देवी, अनीता देवी और सपना देवी ने उन्हें धमकी दी थी कि ‘जब घर वाले सब नहीं रहेंगे तो सब बच्चे को मार देंगे’।






इतने कम उम्र में बिना किसी कारण के मरने वाली लड़की का उचित अनुसंधान नहीं किया गया है। पूर्व अनुसंधानक ने यह पता नहीं लगाया कि घटना के समय अभियुक्तगण कहाँ थे और 13 साल की लड़की ने आत्महत्या क्यों की।
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में पूर्व अनुसंधानक की जांच में भारी लापरवाही पाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना किसी ठोस कारण के इतनी कम उम्र की बच्ची की मौत का उचित अनुसंधान नहीं हुआ। न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व अनुसंधानक यह पता लगाने में विफल रहे कि घटना के समय आरोपी कहां थे और 13 साल की लड़की ने आत्महत्या क्यों की। कोर्ट ने इसे अनुसंधानक की ‘बहरा कर देने वाली चुप्पी’ करार देते हुए कहा कि ‘तथ्य की भूल’ का आधार कानूनी दृष्टि से सही नहीं है।
SSP को 90 दिन में नई जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
बेनीपुर कोर्ट ने दरभंगा SSP को इस मामले में एक अलग और सक्षम अनुसंधानक नियुक्त करने का आदेश दिया है। इस नए अनुसंधानक को 90 दिनों के भीतर निम्न बिंदुओं पर विस्तृत और निष्पक्ष जांच कर माननीय न्यायालय में रिपोर्ट समर्पित करनी होगी:
- 13 वर्षीय बच्ची की हत्या का सही कारण और motive (मकसद) क्या था।
- अभियुक्तगण संजू देवी, शीला देवी, अनीता देवी, सपना देवी का Alibi (घटना के समय कहां थे) – दिनांक 13 दिसंबर 2025 को सुबह 10 से 12 बजे के बीच उनकी उपस्थिति की पुष्टि।
- जमीन विवाद से जुड़े सभी कागजातों की गहन जांच।
- सूचक/परिवार की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच।
इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को तय की गई है, जिस दिन नई अनुसंधान रिपोर्ट पेश की जाएगी।
‘यह आदेश निचली अदालतों के लिए एक मिसाल’
सूचक चंद्रमुनि देवी के अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने इस आदेश को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय ने पूर्व अनुसंधानक के अंतिम प्रतिवेदन को खारिज कर पीड़ित परिवार को न्याय की नई उम्मीद दी है। अधिवक्ता चौधरी ने दृढ़ता से कहा कि 13 साल की नाबालिग बच्ची की मौत को ‘तथ्य की भूल’ कहकर बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नया अनुसंधानक निष्पक्ष जांच कर धारा 103(1)/3(5) BNS के तहत असली दोषियों को कठोर सजा दिलवाएगा। उनके अनुसार, यह आदेश निचली अदालतों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।
न्यायालय के इस फैसले से पीड़ित मां चंद्रमुनि देवी ने भी भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि ‘मेरी बेटी हंसती-खेलती, पढ़ने वाली बच्ची थी। उसे कोई बीमारी नहीं थी। वह suicide नहीं कर सकती। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि नया अनुसंधानक मेरी बेटी को इंसाफ दिलाएगा’। यह फैसला बिहार में न्याय प्रणाली की सक्रियता और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।








