Bihar Robotics Education: अब बिहार के स्कूलों में भी छात्र भविष्य की तकनीकों से लैस हो रहे हैं। हनुमाननगर प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय मोरो में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पढ़ाई शुरू हो गई है। विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने के लिए यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत छात्र अब खुद स्मार्ट डस्टबिन, जंपिंग फ्रॉग और मूविंग कैमरा जैसे प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे उनमें तकनीकी दक्षता और वैज्ञानिक सोच का विकास हो रहा है।
यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें छात्रों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग और उनके व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी दी जा रही है।






नई शिक्षा नीति का विजन: छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना
विद्यालय के प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार ने बताया कि नई शिक्षा नीति का मुख्य लक्ष्य बच्चों को आधुनिक तकनीक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), साइबर सेफ्टी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक बनाना है। इसी उद्देश्य के साथ विद्यालय में रोबोटिक्स की बुनियादी जानकारी और ऑर्डिनो (Arduino) पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार ने कहा, ‘नई शिक्षा नीति का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक तकनीक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), साइबर सेफ्टी तथा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक बनाना है।’
प्रशिक्षण सत्र का संचालन प्रधानाध्यापक जितेंद्र कुमार और शिक्षक अनुराग कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने छात्रों को जटिल तकनीकी अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया।
छात्रों ने खुद बनाए ‘स्मार्ट प्रोजेक्ट’, दिखा जबरदस्त उत्साह
इस प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए कई प्रभावशाली प्रोजेक्ट बनाए। इनमें स्मार्ट डस्टबिन, जंपिंग फ्रॉग, मूविंग कैमरा और स्मोक डिटेक्टर जैसे मॉडल शामिल हैं। छात्रों ने ऑर्डिनो किट पर स्वयं अभ्यास किया और विभिन्न मॉडलों के संचालन व प्रोग्रामिंग की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों में तकनीक को लेकर एक विशेष उत्साह और गहरी जिज्ञासा देखने को मिली। शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से छात्रों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार की भावना और तकनीकी दक्षता का विकास होगा। यह उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगा और उन्हें नई पीढ़ी के आविष्कारक बनने के लिए प्रेरित करेगा।








