Bihar Prohibition Law: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को शराब पीने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए अब खून की जांच अनिवार्य होगी। इस निर्णय से Bihar में शराबबंदी से जुड़े हजारों मामलों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर के एक्साइज थाने में 10 साल पहले दर्ज एक एफआईआर और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को भी खारिज कर दिया है। यह मामला 24 नवंबर 2016 का है, जब बीएमपी-6 के जवान मनोज ठाकुर को नशे की हालत में हंगामा करते हुए पकड़ा गया था। एक्साइज विभाग ने ब्रेथ एनालाइजर से जांच के बाद शराब पीने की पुष्टि की थी और मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया था। मनोज बेगूसराय के गोशाला रोड के रहने वाले हैं।






ब्रेथ एनालाइजर सिर्फ शुरुआती जांच, खून की रिपोर्ट अनिवार्य
सरकारी कर्मियों के लिए बिहार में शराब पीने पर नौकरी से बर्खास्तगी का प्रावधान है। मनोज ठाकुर ने पटना हाईकोर्ट में अपील दायर कर निचली अदालत के संज्ञान और एफआईआर को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन से सिर्फ शुरुआती जांच होती है। किसी को दोषी ठहराने के लिए वैज्ञानिक रूप से खून की जांच की रिपोर्ट जरूरी है। इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे और यह शराबबंदी कानून के तहत होने वाली गिरफ्तारियों और सजा के प्रावधानों को प्रभावित करेगा।
शराब माफिया की संपत्ति जब्त करने का बड़ा अभियान
एक तरफ जहां हाईकोर्ट ने शराबबंदी के तहत सबूतों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है, वहीं दूसरी ओर तिरहुत रेंज में शराब माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। डीआईजी चंदन कुशवाहा ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के टॉप-3 शराब माफिया की संपत्ति जब्त करें। उनका मानना है कि सिर्फ गिरफ्तारी से शराब के धंधे पर रोक लगाना संभव नहीं है, बल्कि उनकी ‘आर्थिक कमर तोड़ना’ जरूरी है।
डीआईजी चंदन कुशवाहा ने स्पष्ट कहा, ‘शराब माफिया की आर्थिक कमर तोड़े बिना इस धंधे पर रोक संभव नहीं है। सिर्फ गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, उनकी अवैध संपत्ति जब्त करनी होगी।’
इस अभियान के तहत, अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से जिन माफियाओं ने बड़ी संपत्ति बनाई है, उनकी जांच की जाएगी। इसमें 2016 से अब तक खरीदी गई जमीन, मकान, फ्लैट, लग्जरी गाड़ियां और बैंक निवेश शामिल होंगे।
बेनामी संपत्ति और लापरवाह थानेदारों पर भी शिकंजा
पुलिस को आशंका है कि कई शराब माफिया ने अपनी करोड़ों की अवैध संपत्ति पत्नी, बेटे, भाई और अन्य करीबियों के नाम पर खरीद रखी है। ऐसे में माफिया के साथ-साथ उनके करीबियों की संपत्ति की भी गहन जांच होगी। अगर यह साबित होता है कि संपत्ति अवैध शराब के धंधे से अर्जित की गई है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति मिलने पर आर्थिक अपराध इकाई और प्रवर्तन निदेशालय को भी मामले भेजे जाएंगे।
डीआईजी ने सभी थानेदारों को 15 दिन के भीतर अपने क्षेत्र के तीन सबसे बड़े शराब माफिया का पूरा ब्योरा भेजने का टास्क दिया है। इसमें लापरवाही बरतने वाले थानेदारों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तिरहुत रेंज के मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में यह अभियान एक साथ चलेगा। मुजफ्फरपुर जिले में 48 थाना व ओपी मिलाकर 140 शराब माफियाओं की सूची तैयार की गई है, जिनकी संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। थानेदार सीओ, निबंधन कार्यालय और बैंकों से समन्वय कर संपत्ति का पूरा ब्योरा जुटाएंगे।








