Bihar Constable Exam Scam: बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान हुए बड़े फर्जीवाड़े को राज्य सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस Bihar Constable Exam Scam की कमान अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को सौंप दी गई है। ईओयू ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 15 लोगों को अभियुक्त बनाया है, जिसमें परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक और जैमर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार के कड़े निर्देश के बाद ईओयू ने नवादा के सदर थाने में दर्ज केस संख्या 610/26 को पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण का खुलासा नवादा के कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक वाल्मीकि प्रसाद के लिखित बयान पर हुआ था, जहां बायोमेट्रिक और जैमर ऑपरेटरों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर चोरी कराई गई थी।






धांधली का पर्दाफाश: नवादा से जुड़ा मामला
पुलिस और जांच एजेंसियों की रडार पर इस समय परीक्षा में धांधली कराने वाला एक बहुत बड़ा संगठित गिरोह है। यह पूरा मामला बीते 14 जून को आयोजित मद्य निषेध सिपाही, जेल गार्ड एवं चलंत दस्ता सिपाही की परीक्षा से जुड़ा है। ईओयू ने इस कांड में सात परीक्षार्थियों सहित कुल 15 लोगों को अभियुक्त बनाया है। इन अभियुक्तों में विपिन कुमार, विकास कुमार, कुणाल कुमार, रोहित कुमार, रौशन कुमार और मनीष कुमार शामिल हैं, जो परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक व जैमर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात दो इन्विजिलेटर पर भी लापरवाही के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
ऐसे किया गया था फर्जीवाड़ा: बाथरूम में मोबाइल और आंसर-की का खेल
जांच के दौरान परीक्षा केंद्र के अंदर से जो सबूत मिले हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। केंद्र के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि होने के बाद पुलिस ने जैमर कर्मी विपिन को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में उसने कार्यालय के पीछे बने बाथरूम के ऊपर छुपाकर रखा गया एक मोबाइल बरामद करवाया। इस मोबाइल में सात परीक्षार्थियों के नाम, उनके रोल नंबर के आखिरी तीन अंक और प्रश्न पत्र के सेट की तस्वीरें मिलीं।
आगे की पूछताछ में पता चला कि बायोमेट्रिक के ठेकेदार रोहित कुमार उर्फ मुरारी के निर्देश पर 10 से 100 तक सीरियल नंबर वाली एक ‘आंसर की’ तैयार की गई थी। इस आंसर-की को जैमर ऑपरेटर विपिन ने चालाकी से कैंडिडेट तक पहुंचाया था। इस पूरे काम के लिए मैनपावर का ठेका लेने वाले गिरोह को मोटी रकम दी गई थी, जिससे साफ होता है कि यह एक सुनियोजित और संगठित फर्जीवाड़ा था।
आर्थिक अपराध इकाई की टीम अब इस संगठित गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में ऐसी धांधली पर रोक लगाई जा सके। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा की शुचिता भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।








