Bhagalpur Uttarayan Project: बिहार के भागलपुर शहर को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। एक महत्वाकांक्षी ‘उत्तरायण परियोजना’ का ऐलान किया गया है, जिसका लक्ष्य भागलपुर को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाना है। इस ऐतिहासिक अभियान के तहत शिक्षा, अध्यात्म, स्वास्थ्य, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक सेवा को एक ही मंच पर लाने का संकल्प लिया गया है, जो शहर के संपूर्ण विकास की राह खोलेगा।
हाल ही में भागलपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ‘उत्तरायण परियोजना’ की घोषणा करते हुए वक्ताओं ने इसे एक ऐतिहासिक अभियान बताया। उन्होंने जोर दिया कि इसका उद्देश्य भागलपुर को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक पहचान दिलाना है।






विश्वस्तरीय सुविधाएं और बहुआयामी विकास
परियोजना के तहत श्री विष्णु उत्तरायण मंदिर एवं ऋष्यश्रृंग आश्रम को विकसित करने की योजना है। इन्हें केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि ध्यान, योग, वैदिक अध्ययन, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और मानव सेवा के केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही, कई अन्य विश्वस्तरीय सुविधाओं का भी प्रस्ताव है।
इनमें विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान, बहुविषयी अनुसंधान केंद्र, आधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, मीडिया सेंटर, कौशल विकास केंद्र और सामुदायिक विकास कार्यक्रम शामिल हैं। ये सभी पहल भागलपुर के चौतरफा विकास को सुनिश्चित करेंगी।
मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन: उत्तरायण छात्रवृत्ति
कार्यक्रम के दौरान डीपीएस भागलपुर और वी.बी. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया। इसके अतिरिक्त, NILET और STPI जैसे नए प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने की महत्वपूर्ण घोषणा की गई। यह युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों के लिए ‘उत्तरायण छात्रवृत्ति’ योजना का भी शुभारंभ किया गया। इस योजना के तहत एलआईसी समर्थित निधि से प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी, जिससे कोई भी प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक बाधा के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। मेधावी छात्रों सिद्धांत और खुशी को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की रूपरेखा
उत्तरायण परियोजना में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें सौर ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन, हरित परिसर का निर्माण और गंगा पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। वक्ताओं ने सभी से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
वक्ताओं ने सरकार, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों, CSR संगठनों और समाज के सभी वर्गों से इस अभियान में सहभागी बनने का आग्रह किया।
इस अवसर पर 9 अगस्त 2026 को सैंडिस कंपाउंड में एक विशेष आध्यात्मिक व्याख्यान की भी घोषणा की गई। कार्यक्रम का समापन भागलपुर को शिक्षा, सेवा और अध्यात्म के माध्यम से विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ हुआ। यह परियोजना भागलपुर के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।








