Bihar Court News: बिहार की दरभंगा अदालतों में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले सामने आए हैं, जिन्होंने अलग-अलग मामलों में आरोपित व्यक्तियों के भविष्य पर सीधा असर डाला है। एक ओर जहां केवटी के एक पत्रकार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया है, वहीं अपहरण और साइबर अपराध जैसे गंभीर आरोपों से घिरे दो अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। इन फैसलों ने स्थानीय न्यायिक प्रक्रिया की गति और गंभीरता को दर्शाया है।
पत्रकार को 24 दिन बाद मिली जमानत
दरभंगा के विशेष न्यायाधीश नवीन कुमार ठाकुर की अदालत ने केवटी के पत्रकार विजय कुमार गुप्ता और इकबाल अंसारी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। इन दोनों को 24 दिन से काराधीन रखा गया था। यह मामला केवटी प्रखंड प्रमुख द्वारा दर्ज कराया गया था, जिसमें उन पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए रंगदारी मांगने का आरोप लगाया गया था। यह प्राथमिकी कांड संख्या 173/26 के तहत दर्ज की गई थी। इस फैसले से पत्रकार और उनके साथी को बड़ी राहत मिली है।






अपहरणकर्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आदि देव की अदालत ने अपहरण के एक गंभीर मामले में आरोपी सलाउद्दीन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। सलाउद्दीन लहेरियासराय थाना क्षेत्र के पुरानी मचट्टा बाकरगंज मोमिन टोला निवासी निज़ामुद्दीन का पुत्र है। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि अभियुक्त ने दो बच्चों की मां का अपने गलत इरादों से अपहरण किया था। अपहृता के साथ उसका एक पुत्र और एक पुत्री भी थे। यह जघन्य मामला सदर थाना में 4 अक्टूबर 2024 को कांड संख्या 256/2024 के तहत दर्ज किया गया था। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
साइबर अपराध के आरोपी को भी राहत नहीं
इसी अदालत ने साइबर थाना प्राथमिकी संख्या 24/26 के एक अन्य अभियुक्त अरशद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी। अरशद बहादुरपुर थाना के एकमिघाट निवासी नक्की अहमद का पुत्र है। आरोपी पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर जानबूझकर एक सुनियोजित साजिश के तहत असत्य, भ्रामक और आपत्तिजनक संदेश फैलाए थे। इन संदेशों के माध्यम से एक विशेष समुदाय के विरुद्ध उन्माद फैलाने का प्रयास किया गया था, जिससे मिथिला माइनॉरिटी डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, एकमिघाट में दहशत का माहौल बन गया था। यह प्राथमिकी डेंटल कॉलेज के कैंपस सुपरवाइजर के आवेदन पर साइबर थाना में दर्ज की गई थी।
इन विभिन्न न्यायिक फैसलों से स्पष्ट होता है कि दरभंगा की अदालतें अपराध की प्रकृति और साक्ष्यों के आधार पर सख्त निर्णय ले रही हैं, चाहे वह पत्रकार की रिहाई का मामला हो या गंभीर अपराधों में अग्रिम जमानत याचिकाओं की अस्वीकृति।








