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बिहार के बच्चों का भविष्य संवारने की तैयारी: सरकार-यूनिसेफ का स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण और सामाजिक विकास पर मास्टर प्लान!

Bihar Child Welfare Budget: पटना में बिहार सरकार, यूनिसेफ और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने 2026-27 के बाल कल्याण बजट को मजबूत करने के लिए एक तकनीकी परामर्श आयोजित किया। इस बैठक में 15 से अधिक सरकारी विभागों के अधिकारियों ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया, ताकि उनके बेहतर भविष्य की नींव रखी जा सके।

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Bihar Child Welfare Budget: बिहार के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने यूनिसेफ और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार को 2026-27 के बाल कल्याण बजट को सशक्त बनाने के लिए एक तकनीकी परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सरकारी खर्च को बच्चों के हितों के अनुरूप बनाने और प्रभावी परिणामों पर जोर देने के लिए गहन विचार-विमर्श हुआ।

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परिणामोन्मुखी बजट पर बिहार सरकार का जोर

बिहार सरकार के वित्त विभाग में व्यय सचिव, रचना पाटिल ने इस अवसर पर कहा कि यह परामर्श बैठक विभिन्न विभागों के लिए बच्चों पर केंद्रित बजट को मजबूत करने और इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने का एक अवसर है। उन्होंने बताया कि 2013-14 में बाल कल्याण बजट की शुरुआत के बाद से बिहार ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और बाल संरक्षण में निवेश बढ़ाया है। पाटिल ने जोर दिया कि उच्च बजट आवंटन के साथ-साथ खर्च की दक्षता और मापने योग्य परिणामों का नियमित मूल्यांकन भी आवश्यक है।

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बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए यूनिसेफ की अपील

यूनिसेफ बिहार फील्ड ऑफिस की प्रमुख मोनिका नील्सन ने कहा कि बिहार ने बच्चों से संबंधित मुद्दों को प्राथमिकता देने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बाल कल्याण बजट को और मजबूत करने से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण और सामाजिक विकास के परिणामों में सुधार होगा। नील्सन ने बजट विश्लेषण से आगे बढ़कर ऐसे सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया, जो योजना, खर्च की दक्षता और जवाबदेही में सुधार करें। उन्होंने राज्य के बाल-केंद्रित बजट पहलों के लिए यूनिसेफ के समर्थन की पुष्टि की।

संविधान और कानूनों में बच्चों के लिए दिए गए सुरक्षा उपायों को पर्याप्त सार्वजनिक निवेश का समर्थन मिलना चाहिए। साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और अनुभवजन्य डेटा को बच्चों के लिए नीति-निर्माण और बजट को दिशा देनी चाहिए। – एस. पी. सिंह, रजिस्ट्रार, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी

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बजट विश्लेषण और प्रभावी प्रथाओं पर चर्चा

तकनीकी सत्रों की शुरुआत यूनिसेफ बिहार के सामाजिक नीति विशेषज्ञ अभय कुमार की प्रस्तुति से हुई, जिसमें बिहार सरकार के 2026-27 के बाल कल्याण बजट विश्लेषण के निष्कर्षों को प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में पिछले एक दशक में बजट आवंटन के रुझानों, व्यय पैटर्न और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई। इसमें बजट वर्गीकरण, व्यय ट्रैकिंग और परिणाम माप में सुधार के अवसरों की भी पहचान की गई। यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस के ‘बच्चों के लिए वित्तपोषण’ विशेषज्ञ सौमेन बागची ने बाल-अनुकूल सार्वजनिक वित्त में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने योजना, बजट और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की।

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रचना पाटिल की अध्यक्षता में हुई विभाग-वार चर्चा में मौजूदा बजट प्रथाओं की समीक्षा की गई। इसमें वर्गीकरण और उपयोग में मौजूद खामियों की पहचान की गई, साथ ही बिहार के बाल कल्याण बजट को बच्चों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के लिए सिफारिशों पर विचार किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार की लगभग आधी आबादी बच्चों की है, और उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा तथा बाल संरक्षण में निरंतर सुधार के लिए मजबूत सार्वजनिक वित्तीय योजना, कुशल संसाधन आवंटन और बेहतर व्यय ट्रैकिंग आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना की फैकल्टी सदस्य सुगंधा सिन्हा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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इस परामर्श बैठक में हुए विचार-विमर्श और सुझावों के आधार पर उम्मीद है कि बिहार सरकार बच्चों के कल्याण के लिए अपनी वित्तीय नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाएगी। इससे राज्य के बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा में दीर्घकालिक सुधार देखने को मिलेंगे, जो एक मजबूत और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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