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रुका पेमेंट ठेकेदारी का- बिहार में ठेकेदारों की ‘आफत’: सरकारी विभागों पर 50 हजार करोड़ का भारी-भरकम बकाया | क्यों फंसे हजारों संवेदक! | किन विभागों पर कितना बकाया, देखें पूरी लिस्ट

Bihar Contractors: पिछले 9-10 महीनों से लंबित भुगतान ने बिहार के हजारों ठेकेदारों की कमर तोड़ दी है। छोटे संवेदकों के सिबिल रिकॉर्ड खराब हो रहे हैं, कई के सामने कारोबार बंद करने की नौबत आ गई है। मुख्य सचिव के हस्तक्षेप के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं।

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Bihar Contractors: पिछले लगभग नौ से दस महीनों से सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों का भुगतान अधर में लटका हुआ है। बिहार संवेदक संघ का दावा है कि विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि जमा हो गई है। इस गंभीर वित्तीय संकट ने राज्य के निर्माण क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा छोटे और मझोले ठेकेदारों को भुगतना पड़ रहा है।

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मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के दखल के बाद ग्रामीण कार्य विभाग ने करीब 500 करोड़ रुपये का भुगतान तो किया, लेकिन यह कुल बकाया राशि का एक छोटा हिस्सा ही है। अधिकांश विभागों में अभी भी बड़ी संख्या में बिल लंबित हैं, जिससे हजारों संवेदकों का भविष्य दांव पर लगा है।

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सरकारी भुगतान में देरी से निर्माण क्षेत्र पर गहरा संकट

संवेदक संघ के अनुसार, राज्य के लगभग ढाई दर्जन विभागों, निगमों और सरकारी एजेंसियों के तहत किए गए कार्यों का भुगतान पिछले वर्ष अक्टूबर से ही अटका हुआ है। इस लंबी अवधि से भुगतान न मिलने के कारण कई निर्माण एजेंसियों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। ठेकेदारों का कहना है कि इतने लंबे समय तक पैसे न मिलने से न केवल चल रही परियोजनाओं का संचालन मुश्किल हो गया है, बल्कि नई योजनाओं में भागीदारी करना भी असंभव होता जा रहा है।

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भुगतान में देरी का सबसे अधिक असर छोटे और मझोले संवेदकों पर पड़ रहा है। संघ के मुताबिक, राज्य के करीब 95 प्रतिशत ठेकेदार एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) श्रेणी से जुड़े हैं, जिनकी कार्यशील पूंजी सीमित होती है। कई महीनों तक भुगतान न मिलने से उन्हें बैंक ऋण चुकाने, मजदूरों को वेतन देने और निर्माण सामग्री खरीदने जैसे रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में भारी कठिनाई हो रही है।

बिहार संवेदक संघ के अध्यक्ष सुयश कुमार उर्फ मुन्नाजी ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “लगातार भुगतान लंबित रहने से कई ठेकेदारों का सिबिल रिकॉर्ड भी प्रभावित हो रहा है। इसका असर भविष्य में बैंक से ऋण लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। वित्तीय दबाव के कारण कई छोटे संवेदकों के सामने कामकाज जारी रखना चुनौती बन गया है।”

किन विभागों पर कितना बकाया, देखें पूरी लिस्ट

बकाया भुगतान के मामले में कई बड़े सरकारी विभागों के नाम सामने आए हैं, जहां हजारों करोड़ रुपये के बिल फंसे हुए हैं। यह आंकड़े निर्माण क्षेत्र में व्याप्त गंभीर संकट की तस्वीर पेश करते हैं:

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विभाग का नामलंबित बकाया (लगभग)
भवन निर्माण विभाग3000 करोड़ रुपये
ग्रामीण कार्य विभाग2100 करोड़ रुपये
पथ निर्माण विभाग1500 करोड़ रुपये
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी)1500 करोड़ रुपये
लघु जल संसाधन विभाग1000 करोड़ रुपये
जल संसाधन विभाग500 करोड़ रुपये से अधिक

उपरोक्त विभागों के अलावा, पुल, सड़क एवं भवन निर्माण निगम, बुडको, बियाडा, अयाडा, बीएमएसआईसीएल, बीपीबीसीसी, पर्यटन विकास निगम और बिजली क्षेत्र की कई सरकारी कंपनियों में भी संवेदकों के भुगतान लंबित होने की जानकारी मिली है। यह स्थिति विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े Bihar Contractors की चिंता बढ़ा रही है।

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सरकारी निर्देश बेअसर, विकास परियोजनाओं पर संकट के बादल

राज्य सरकार ने पहले ही सभी विभागों को लंबित भुगतानों को नियमानुसार जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। वित्त विभाग ने भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पीडी खाते में राशि पार्क न की जाए और बिना किसी वैध कारण के किसी भी बिल को लंबित न रखा जाए। इसके साथ ही, सरकारी निगमों और कंपनियों को जरूरत पड़ने पर ऋण लेकर भी अपनी देनदारियों का निपटारा करने को कहा गया है।

हालांकि, ठेकेदारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर भुगतान की रफ्तार अभी भी बेहद धीमी बनी हुई है। कई विभागों में बिलों का निस्तारण अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है, जिससे उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। संबंधित एजेंसियों की ओर से भी बकाया Government Payments को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस भुगतान प्रक्रिया में तेजी नहीं आती है, तो इसका सीधा असर राज्य की विकास परियोजनाओं की गति पर पड़ सकता है। छोटे ठेकेदारों के लिए, समय पर भुगतान ही उनके कामकाज की निरंतरता और रोजगार व्यवस्था को बनाए रखने का एकमात्र उपाय है। फिलहाल, सभी की निगाहें सरकार और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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