Darbhanga Road Accident: बिहार के दरभंगा जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की घोर लापरवाही एक बार फिर तीन परिवारों के लिए आजीवन दर्द बन गई है। कुशेश्वरस्थान पूर्वी में धबौलिया पुल पर शनिवार रात खड़ी एक ट्रक से बुलेट की भीषण टक्कर में भारतीय सेना के जवान अखिलेश आनंद, पंकज राय और बादल कुमार यादव की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना ने तीन गांवों को मातम में डुबो दिया है। एक साथ तीन घरों के चिराग बुझने के बाद स्थानीय लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर सड़क पर अवैध पार्किंग पर लगाम कब लगेगी?
अवैध पार्किंग: हादसों की एक पुरानी कहानी
धबौलिया पुल पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसएच-56 पर धबौलिया पुल सहित कई स्थानों पर भारी वाहनों को घंटों और कई बार पूरी रात सड़क पर ही खड़ा कर दिया जाता है। इससे सड़क संकरी हो जाती है और राहगीरों को हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है। परिणामस्वरूप, सड़क पर खड़ी ये गाड़ियां ‘मौत’ बनकर लोगों की जान ले रही हैं।







प्रशासन की अनदेखी और पंचायत समिति की चेतावनी
ग्रामीण बताते हैं कि यह पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष भी कुशेश्वरस्थान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के सामने सड़क पर चल रहे एक ट्रक ने एक बुजुर्ग को रौंद दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद भी लोगों ने सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की अवैध पार्किंग पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन मामला कुछ दिनों में ही ठंडे बस्ते में चला गया।

पंचायत समिति की बैठक में भी कई जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था। मुखिया और पंचायत समिति सदस्यों ने सड़क किनारे अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और सड़क पर निर्माण सामग्री रखे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी।
हालांकि, धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि शनिवार रात धबौलिया पुल पर खड़ी ट्रक से टकराकर भारतीय सेना के जवान अखिलेश आनंद, पंकज राय और बादल कुमार यादव की जान चली गई।
अब भी नहीं जागा प्रशासन तो और कितनी जानें जाएंगी?
इस हादसे के बाद एक घर में बेटी का जन्मदिन मनाने की तैयारी धरी रह गई, दूसरे घर में छोटे-छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, और तीसरे घर में मां की आँखों के सामने जवान बेटे की अर्थी उठ गई। रविवार को तीनों गांवों में चूल्हे नहीं जले, हर ओर सिर्फ चीख-पुकार और गम का माहौल था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग पर पहले ही सख्ती की गई होती, तो शायद आज तीन परिवार तबाह नहीं होते।
पूरे क्षेत्र के लोग अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि धबौलिया पुल और एसएच-56 पर सड़क पर खड़े होने वाले भारी वाहनों के खिलाफ तत्काल सख्त अभियान चलाया जाए। अवैध अतिक्रमण हटाया जाए, नियमित निगरानी की व्यवस्था हो और दोषी वाहन चालकों एवं मालिकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का सवाल है कि आखिर हर बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है? कितनी और जानें जाने के बाद Bihar Road Accident को रोकने के लिए सड़क पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होगी?










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