Bihar Shops Act: बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के लाखों छोटे दुकानदारों और व्यवसायों पर पड़ेगा। ‘बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) (निरसन) विधेयक, 2026’ का उद्देश्य मौजूदा दुकान अधिनियम को निरस्त करना और इसे केंद्र सरकार के श्रम सुधारों के अनुरूप लाना है। इस नए कानून के लागू होने से छोटे कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन की बाध्यता से बड़ी राहत मिलेगी, जबकि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत: अब रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं?
प्रस्तावित विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण की अनिवार्यता से जुड़ा है। वर्तमान बिहार दुकान अधिनियम के तहत, एक या दो कर्मचारी रखने वाले प्रतिष्ठानों को भी पंजीकरण कराना पड़ता था। नए विधेयक के अनुसार, अब केवल उन्हीं दुकानों और प्रतिष्ठानों को पंजीकरण कराना होगा, जिनमें 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम छोटे दुकानदारों और सूक्ष्म उद्यमों पर से प्रशासनिक बोझ कम करेगा, जिन्हें अभी तक कुछ ही कर्मचारियों के बावजूद पंजीकरण औपचारिकताओं का पालन करना पड़ता था।






शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में एक समान नियम, श्रमिकों को मिलेगा सुरक्षा कवच
इसके अतिरिक्त, यह नया कानून बिहार में एक समान नियामक ढांचा लागू करने का प्रयास करता है। पहले की प्रणाली मुख्य रूप से शहरी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर केंद्रित थी, लेकिन अब नए प्रावधान ग्रामीण क्षेत्रों पर भी लागू होंगे। चाहे कोई दुकान या प्रतिष्ठान शहर में हो या गांव में, यदि उसमें 10 या अधिक कर्मचारी हैं, तो उसे पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव बिहार के श्रम नियमों को केंद्र सरकार के नए श्रम संहिता के अनुरूप लाएगा और राज्य भर में एक समान अनुपालन तंत्र बनाएगा।

सरकार के मुताबिक, नए श्रम ढांचे के तहत आने वाले प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसमें कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) जैसी योजनाएं शामिल होंगी, जहां वे पात्र होंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस नियामक ढांचे से श्रमिकों और उनके परिवारों को कार्यस्थल दुर्घटनाओं या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों में सरकारी लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस विधेयक को ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020’ के लागू होने के बाद मौजूदा दुकान अधिनियम को औपचारिक रूप से निरस्त करने के लिए पेश किया गया है। सरकार के अनुसार, पुराने कानून को पहले ही एक अध्यादेश के माध्यम से निरस्त किया जा चुका था। विधानसभा में पेश किया गया यह विधेयक उसी निर्णय को स्थायी विधायी समर्थन प्रदान करना चाहता है।
यह विधेयक अब बिहार विधानसभा में विचार के लिए रखा जाएगा। यदि यह विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा पारित हो जाता है और राज्यपाल की स्वीकृति मिल जाती है, तो नया कानून लागू हो जाएगा। इसके साथ ही मौजूदा दुकान अधिनियम समाप्त हो जाएगा और पूरे बिहार में संशोधित पंजीकरण मानदंड प्रभावी हो जाएंगे, जिससे व्यापार करने में सुगमता और श्रमिकों के लिए बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।









