Bihar Student Arrest: हाल ही में पटना में हुए छात्र प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई से आम जनजीवन में हड़कंप मच गया है। सैकड़ों परिवारों का दर्द जजेज आवास के बाहर सड़कों पर छलक उठा, जब उन्होंने अपने बेटों की रिहाई की गुहार लगाई। इन परिवारों का आरोप है कि उनके बच्चों को बेवजह गिरफ्तार किया गया और पुलिस हिरासत में उनके साथ बर्बरता की गई। एक पिता ने भावुक होकर बताया कि उनका बेटा सिर्फ दवा लेने घर से निकला था, लेकिन पुलिस ने उसे उठा लिया और इतना पीटा कि वह चल भी नहीं पा रहा है।
परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें हिरासत में लिए गए छात्रों के साथ मारपीट और उन्हें अपराधी जैसा व्यवहार देना शामिल है। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके बच्चों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और 121 लगाई है।






Bihar Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में 25 जुलाई को हुए बिहार बंद के दौरान कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इन घटनाओं के बीच सीवान में पुलिस की गोलीबारी में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका पटना के जयप्रभा मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बर्थडे केक लेने निकला युवक बना गोली का शिकार
सीवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, जिनकी हालत फिलहाल स्थिर है। इन्हीं में से एक घायल युवक आकाश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार, आकाश अपने जन्मदिन के लिए बेकरी से केक खरीदकर लौट रहा था, तभी वह अचानक हिंसा और पुलिस फायरिंग की चपेट में आ गया। इलाज के बाद उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार देखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई: किस जिले में कितने गिरफ्तार?
नीट पेपर लीक के खिलाफ बिहार बंद के दूसरे दिन भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। रविवार को पटना, सीवान, छपरा, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, भागलपुर, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा और लखीसराय समेत सभी प्रभावित जिलों में पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। 400 से अधिक उपद्रवियों और साजिशकर्ताओं को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है। शनिवार को हुए प्रदर्शन और पुलिस पर हमले में शामिल लोगों की पहचान के लिए कई जिलों में पुलिस ने सैकड़ों तस्वीरें और पोस्टर जारी किए हैं।
| जिला | गिरफ्तारी / कार्रवाई का विवरण |
|---|---|
| पटना | शनिवार को हिरासत में लिए गए 300 से अधिक लोगों में से पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव सहित 190 को रविवार को जेल भेजा गया। 30 छात्राओं को निजी मुचलके पर रिहा किया गया, जबकि 200 अन्य युवाओं को सख्त चेतावनी के साथ छोड़ा गया। |
| छपरा | 97 उपद्रवियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी कर पहचान मांगी गई है। अब तक 40 से अधिक नामजद और 150 से अधिक हिरासत में लिए गए हैं। |
| औरंगाबाद | 106 संदिग्धों की तस्वीरें जारी की गई हैं। 12 नामजद और 1000 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर तीन को गिरफ्तार किया गया है। |
| सीवान | गोलीबारी और पथराव के मामले में पुलिस ने 102 लोगों को गिरफ्तार किया है। 2500 से अधिक अज्ञात पर केस दर्ज हुआ है। इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। |
| सीतामढ़ी | हिंसा और आगजनी के मामले में आठ उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और कई की तस्वीरें जारी की गई हैं। |
| किशनगंज व भागलपुर | कोसी-सीमांचल में लॉज, हॉस्टल में छापे मारे गए। किशनगंज में 55 और भागलपुर में 155 लोगों सहित अन्य जिलों में तस्वीरें जारी की गई हैं। |
इन गिरफ्तारियों और पहचान अभियानों से पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था को भंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की अपील और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे प्रदर्शन और पुलिस पर हमले में शामिल उपद्रवियों की पहचान करने में सहयोग करें। इसके लिए कई जिलों में सैकड़ों तस्वीरें और पोस्टर जारी किए गए हैं। लॉज, हॉस्टल और होटलों में भी संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
नीट पेपर लीक के बाद हुए प्रदर्शनों पर पुलिस की यह व्यापक कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अगले कुछ दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है, क्योंकि पुलिस उपद्रवियों की पहचान के लिए अभियान चला रही है।
पुलिस पर बर्बरता और गलत जानकारी देने का आरोप
गिरफ्तार छात्रों के परिजनों का दावा है कि जब उन्हें बच्चों की गिरफ्तारी की खबर मिली, तो पुलिस ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी। उन्हें गांधी मैदान थाना और राजीव नगर थाना के बीच भटकाया गया। परिजनों के अनुसार, छात्रों को 30 से 35 घंटे तक थाने में बंद रखा गया। इसके बाद देर रात जजेज आवास में पेशी के बाद सभी गिरफ्तार छात्रों को बेऊर जेल भेज दिया गया।
कई अभिभावकों ने अपनी आपबीती सुनाई। एक पिता ने बताया कि उनका बेटा लैपटॉप खरीदने एसपी वर्मा रोड गया था, जिसे पुलिस ने उठा लिया। एक अन्य परिजन ने कहा कि उनका भाई गांधी मैदान के पास सब्जी खरीदने गया था, और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसका फोन भी जब्त कर लिया, जिससे परिवार को कोई सूचना नहीं मिल पाई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने गेट के बाहर उनके साथ धक्का-मुक्की की।
क्या है पूरा मामला और पुलिस का पक्ष?
दरअसल, पिछले दिनों 22 और 25 जुलाई को पटना में छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। 25 जुलाई को स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि छात्रों पर पुलिस पर पथराव करने का आरोप लगा। इसके बाद पुलिस एक्शन मोड में आ गई और सीसीटीवी फुटेज, वीडियो तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर छात्रों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाने लगा। रविवार की आधी रात को 258 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया।
इस मामले में कुल 24 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 285 नामजद और करीब 6 हजार अज्ञात आरोपित शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, नाबालिग छात्रों को गांधी मैदान में रखा गया, जबकि बालिग छात्रों को जजेज आवास में पेशी के बाद बेऊर जेल भेजा गया। छात्रों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास) और धारा 121 (लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने या डराने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 22 जुलाई के प्रदर्शन के बाद भी 117 संदिग्धों के फोटो जारी किए गए थे।
आगे क्या होगा?
छात्रों की गिरफ्तारी और परिजनों के आरोपों के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। परिवारों की मांग है कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द रिहा किया जाए और पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, जो इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ करेगा।








