Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बीजेपी ने एक बार फिर तीखा हमला बोला है। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि उनकी पार्टी राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए संसद में जल्द ही एक प्रस्ताव ला सकती है। उन्होंने राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं जानिए – आज मकर द्वार पर क्या हुआ! देखें तस्वीर
विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर BJP का ‘सबसे बड़ा’ हमला: देश तोड़ने की साजिश और जॉर्ज सोरोस से रिश्तों पर SIT जांच की मांग!
Rahul Gandhi: बीजेपी ने एक बार फिर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि बीजेपी बहुत जल्द राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर सकती है। दुबे का कहना है कि राहुल गांधी की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है, क्योंकि 2004 से लेकर 2026 के बीच उन्होंने जितनी भी विदेश यात्राएं की हैं, उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।






विदेशी दौरों और जॉर्ज सोरोस से रिश्तों पर उठे सवाल
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी वे विदेश जाते हैं, तो देश, सरकार और संविधान के खिलाफ ही बयानबाजी करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन विदेशी दौरों के दौरान राहुल गांधी किससे मिलते हैं, वहां क्या करते हैं, और किस तरह के आंदोलनों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग की बात होती है, यह सब अब तक रहस्य बना हुआ है। बीजेपी सांसद ने दावा किया कि राहुल गांधी की यात्राओं में अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोग शामिल थे। उन्होंने 2008 में कांग्रेस और चीन के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा भी उठाया और पूछा कि उस ‘गुप्त डील’ को आज तक जनता के सामने क्यों नहीं लाया गया?
SIT जांच और देश तोड़ने की साजिश के गंभीर आरोप
निशिकांत दुबे का मानना है कि विपक्ष के नेता को जब देश से बाहर जाना होता है, तो उसे भारत की नीतियों और रुख का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, न कि देश की छवि को खराब करना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि साल 2004 से 2026 तक की राहुल गांधी की सभी विदेश यात्राओं, उनके दोस्तों और तमाम गुप्त समझौतों की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। राहुल गांधी पर और भी सख्त हमला करते हुए दुबे ने कहा कि वे विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं और देश को बांटने की साजिशों में शामिल हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा, ‘राहुल गांधी की जवाबदेही तय होना बहुत जरूरी है, क्योंकि 2004 से लेकर 2026 के बीच उन्होंने जो भी विदेश यात्राएं की हैं, उनके बारे में किसी को कोई साफ जानकारी नहीं है। बीजेपी बहुत जल्द राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर सकती है।’
मौजूदा राजनीतिक माहौल में बयानबाजी की पृष्ठभूमि
निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राहुल गांधी खुद संसद में सरकार से लगातार तीखे सवाल पूछ रहे हैं। हाल ही में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था। इसी के पलटवार में बीजेपी की तरफ से यह बड़ा और आक्रामक बयान आया है। इससे पहले भी सरकार ने राहुल गांधी को संसद में घेरा है। सरकार ने संसद में राहुल गांधी के खिलाफ फरवरी 2026 में लोकसभा में एक सब्सटेंसिव मोशन या गंभीर प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन पर सदन को गुमराह करने और देश की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने व चुनाव लड़ने पर रोक की मांग की गई थी।
विदेश दौरों पर गंभीर आरोप और जॉर्ज सोरोस कनेक्शन
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने साल 2004 से 2026 के बीच जितनी भी विदेश यात्राएं की हैं, उनकी कोई साफ जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि राहुल जब भी विदेश जाते हैं, तो देश, सरकार और संविधान के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। बीजेपी सांसद ने सवाल उठाया कि इन विदेश दौरों के दौरान राहुल किससे मिलते हैं, वहां क्या करते हैं, और किस तरह के आंदोलनों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग की बात होती है, यह सब रहस्य बना हुआ है। दुबे ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं में अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोग शामिल थे। उन्होंने 2008 में कांग्रेस और चीन के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि उस ‘गुप्त डील’ को जनता के सामने आज तक क्यों नहीं लाया गया।
राहुल गांधी के खिलाफ SIT जांच और ‘देश तोड़ने’ की साजिश का दावा
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का मानना है कि विपक्ष के नेता को विदेश में भारत की नीतियों और रुख का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, न कि देश की छवि खराब करनी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है। यह एसआईटी राहुल गांधी की 2004 से 2026 तक की सभी विदेश यात्राओं, उनके दोस्तों और तमाम गुप्त समझौतों की निष्पक्ष जांच करेगी। दुबे ने राहुल गांधी पर और भी सख्त हमला बोलते हुए यहां तक कह दिया कि वे विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं और देश को बांटने की साजिशों में शामिल हैं।
पलटवार के माहौल में बीजेपी का तीखा हमला
निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी खुद संसद में सरकार से कई तीखे सवाल पूछ रहे हैं। हाल ही में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था। इसी के पलटवार में बीजेपी की तरफ से यह बड़ा हमला किया गया है।

संसद के मकर द्वार पर आज सुबह क्या हुआ?
विपक्षी सांसदों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व वाले छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की।

इस दौरान, सांसदों ने नारेबाजी भी की
विपक्ष ने कहा कि छात्रों पर हुई बर्बरता के लिए गृहमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं और संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। इससे पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। बैठक में राहुल गांधी, खरगे, प्रमोद तिवारी, सैयद नसीर हुसैन, केसी वेणुगोपाल, गौरव गोगोई, जयराम रमेश समेत तमाम नेता मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि संसद के भीतर और बाहर छात्रों के मुद्दे को लगातार उठाया जाएगा।
सरकार पहले भी संसद में राहुल गांधी को घेर चुकी है
फरवरी 2026 में लोकसभा में एक सब्सटेंसिव मोशन या गंभीर प्रस्ताव पेश किया गया था, जबकि इससे पहले अलग-अलग बयानों और भाषणों पर विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव लाने की चेतावनियां या नोटिस दिए गए थे। बजट सत्र के दौरान भी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ नियम 352(5) और 353 के तहत एक सब्सटेंसिव मोशन पेश किया था। इसमें उन पर सदन को गुमराह करने और देश की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
वहीं, 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों ने संसद मार्च निकाला था। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस झड़प में 100 से अधिक छात्र और कई पुलिसकर्मी घायल हुए । इसके बाद से विपक्ष लगातार छात्रों के समर्थन में खड़ा है और सरकार पर दबाव बना रहा है।









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