Bihar Pest Control: बिहार में सब्जी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है। जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ अभिषेक राणा ने इन फसलों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए ‘समेकित कीट प्रबंधन’ (IPM) अपनाने की खास सलाह दी है। यह वैज्ञानिक तरीका किसानों को रस चूसक कीट, फल मक्खी और टहनी छेदक जैसे हानिकारक कीड़ों से मुक्ति दिलाकर बेहतर उत्पादन और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।
रस चूसक कीटों से कैसे करें बचाव?
कृषि वैज्ञानिक डॉ अभिषेक राणा ने बताया कि इन दिनों किसान अपने खेतों में लौकी, करेला, परवल, तोरई, घेवड़ा जैसी कद्दू वर्गीय फसलें उगा रहे हैं। इसके साथ ही बैंगन, भिंडी और मिर्च की भी व्यापक खेती की जा रही है। इन सभी सब्जियों पर लाही, सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माइट जैसे रस चूसक कीट हमला करते हैं, जो पौधों की पत्तियों, टहनियों, फूलों और फलों से रस चूसकर उनकी वृद्धि को बाधित कर देते हैं। इस नुकसान से बचने के लिए फसलों की नियमित और शुरुआती निगरानी बेहद जरूरी है।






उन्होंने सलाह दी है कि प्रति एकड़ खेत में चार से पांच पीले चिपचिपे ट्रैप लगाएं। यदि कीटों का प्रकोप कम है, तो तीन मिली नीम तेल को प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें। यह जैविक उपाय कीटों को दूर रखने में काफी प्रभावी होता है।
फल मक्खी और बैंगन छेदक कीट का समाधान
फल मक्खी भी किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि यह फलों के भीतर अंडे देकर उन्हें सड़ा देती है। इससे निपटने के लिए प्रति एकड़ चार ट्रैप लगाना चाहिए। इसके अलावा, खेत में गिरे हुए संक्रमित फलों को तुरंत इकट्ठा करके गड्ढे में दबा देना चाहिए, ताकि संक्रमण आगे न फैले।
बैंगन में लगने वाला फल एवं टहनी छेदक कीट भी फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है। डॉ राणा ने इसके नियंत्रण के लिए फेरोमॉन ट्रैप के उपयोग की अनुशंसा की है। ये ट्रैप नर कीटों को आकर्षित कर उन्हें फंसा लेते हैं, जिससे उनकी संख्या नियंत्रित होती है।
रासायनिक कीटनाशकों का सही उपयोग
विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि यदि कीटों का प्रकोप अधिक हो और जैविक या यांत्रिक उपाय पर्याप्त न हों, तो अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन इनका उपयोग विशेषज्ञों की सलाह पर ही करना चाहिए।
कद्दू वर्गीय सब्जियों के लिए सायनट्रानिलिप्रोल 10.26 प्रतिशत ओडी का डेढ़ मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव प्रभावी होता है। वहीं, बैंगन की फसल में एमामेक्टिन बेंजोएट पांच प्रतिशत एसजी का 0.चार ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है।
डॉ अभिषेक राणा ने किसानों से अपील की है कि वे समेकित कीट प्रबंधन के इन तरीकों को अपनाकर अपनी फसलों को सुरक्षित रखें। नियमित निगरानी और सही समय पर उचित उपाय करने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि सब्जियों की गुणवत्ता भी बनी रहेगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।








