Darbhanga Shravani Mela: श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही दरभंगा जिले का ऐतिहासिक बाबा कुशेश्वरनाथ धाम शिवभक्तों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। पूरी शिवनगरी गेरुआ रंग में रंग चुकी है, जहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचेंगे। खासकर रविवार और सोमवार को भीड़ का विशेष दबाव रहने की संभावना है। मंदिर न्यास समिति और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
सुरक्षा और सुविधा का खास इंतजाम
कुशेश्वरस्थान पूर्वी स्थित आस्था के केंद्र बाबा कुशेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो गया है। मंदिर परिसर से लेकर शिवनगरी तक जगह-जगह बैरिकेडिंग, तोरण द्वार, फूल और लाइट से विशेष सजावट की गई है। मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह एसडीओ शशांक राज और उपाध्यक्ष सह एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी लगातार शिवमंदिर और आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, ताकि आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा, सफाई और सुविधा तीनों पर इस बार विशेष ध्यान दिया गया है।






बड़े वाहनों पर प्रतिबंध और पार्किंग की पुख्ता व्यवस्था
श्रावणी मेले में भीड़ और जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने बड़े वाहनों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगाई है। दर्जनों चिन्हित जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है, जिनमें बेरी चौक, सतीघाट, पारों, असमा, काली मंदिर के पास, थाना के बगल में, हजारी चौक, धवौलिया पुल और धवौलिया स्कूल प्रमुख हैं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की भी विस्तृत योजना बनाई गई है:
- दरभंगा की तरफ से आने वाले वाहन:
- बड़े वाहनों के लिए: सतीघाट हाईस्कूल प्रांगण
- तीन पहिया वाहनों के लिए: पारों चौक
- दो पहिया वाहनों के लिए: असमा चौक
- खगड़िया की तरफ से आने वाले वाहन:
- बड़े वाहनों के लिए: मध्य विद्यालय धवौलिया का प्रांगण
- छोटे वाहनों के लिए: धवौलिया पुल से 100 मीटर पूर्व
यह व्यवस्था सुचारु यातायात और भीड़ नियंत्रण में सहायक होगी, जिससे श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन में आसानी होगी।
श्रावण में जलाभिषेक का महत्व और विशेष पूजा विधि
पंडित राज नारायण झा ने बताया कि ‘श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इसी माह समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिवजी ने पान किया था। विष के ताप से उनका शरीर जलने लगा तब देवताओं ने जल से अभिषेक किया, जिससे उन्हें शीतलता मिली। तभी से श्रावण में जलाभिषेक का विशेष महत्व है।’
पंडित श्री झा ने भक्तों के लिए विशेष पूजा विधि भी बताई।
‘जो भक्त विशेष पूजा करना चाहते हैं, वे दूध, गंगाजल, शक्कर, इक्षुरस, कुशोदक से रूद्राभिषेक करें। साथ ही जल, पंचामृत, भांग, चंदन, भस्म, रोली, अक्षत, पुष्प, अकोन, धतूरा, कमल, बिल्वपत्र, शमीपत्र, तुलसी मंजरी, पान, सुपारी और प्रसाद अर्पित करें, इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वैसे तो श्रावण के सभी दिन शिव पूजा के लिए श्रेष्ठ हैं, लेकिन शिव वास के दिन किया गया रूद्राभिषेक सबसे फलदायी माना जाता है।’
प्रशासन ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि ‘बोल बम’ के जयकारों के बीच हर श्रद्धालु शांतिपूर्वक बाबा कुशेश्वरनाथ का जलाभिषेक कर सकेगा। आने वाले दिनों में भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी जाएंगी।








