Deepak Prakash Bihar: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री बिहार में दीपक प्रकाश का मंत्री पद अब बरकरार रहेगा। उनके पद को लेकर उठ रहे संवैधानिक सवालों पर NDA ने बड़ा समाधान निकाल लिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले यह फैसला सामने आया है, जिसमें भाजपा के एक विधान परिषद सदस्य (MLC) मंत्री दीपक प्रकाश के लिए अपनी सीट छोड़ेंगे।
जानकारी के अनुसार, भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार अपना इस्तीफा देंगे। उनके खाली होने वाले स्थान पर दीपक प्रकाश को उच्च सदन भेजा जाएगा। इस कदम के बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने में कोई संवैधानिक अड़चन नहीं आएगी।






मंत्री पद पर संकट! क्या MLC देवेश कुमार के इस्तीफे से दीपक प्रकाश की कुर्सी बचेगी? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला जल्द!
Bihar Politics: पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार शुक्रवार शाम विधान परिषद सभापति को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनके इस्तीफे से खाली होने वाली सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद का चुनाव लड़ाया जा सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब उनके मंत्री पद की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है और शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर पिछले कुछ दिनों से संवैधानिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर गंभीर चर्चा हो रही है। मंत्री बनने के बावजूद, वह अभी तक विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं। एमएलसी चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के कारण उनके सामने संवैधानिक चुनौती खड़ी हो गई थी। अब यदि देवेश कुमार वास्तव में इस्तीफा देते हैं, तो यह स्थिति बदल सकती है और दीपक प्रकाश के लिए सदन में पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है।
बिहार की राजनीति में रास्ता साफ करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, देवेश कुमार अपनी विधान परिषद सदस्यता छोड़कर दीपक प्रकाश के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इसके बाद सत्तारूढ़ गठबंधन उन्हें विधान परिषद का उम्मीदवार बना सकता है। यदि दीपक प्रकाश चुनाव जीतकर सदन के सदस्य बन जाते हैं, तो उनके मंत्री पद को लेकर उठ रहे कई व्यावहारिक और संवैधानिक सवालों का समाधान हो सकता है। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया आधिकारिक घोषणा और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट में मंत्री पद की वैधता पर सुनवाई
दूसरी ओर, कानूनी मोर्चे पर दीपक प्रकाश के सामने चुनौती अभी बनी हुई है। उनके मंत्री पद को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। याचिका में तर्क दिया गया है कि चूंकि वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठता है। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या से जुड़ा हुआ है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे। बाद में सरकार के इस्तीफे के बाद 7 मई 2026 को उन्होंने फिर मंत्री पद की शपथ ली। याचिका में यह दलील दी गई है कि छह महीने की संवैधानिक अवधि दोबारा शुरू नहीं हो सकती। इसलिए उनका मंत्री बने रहना संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि यदि वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, तो निर्धारित अवधि से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। इस मामले में सभी पक्षों के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर यह दोहरा संकट बना हुआ है, जहां एक ओर राजनीतिक समाधान के तौर पर एमएलसी सीट खाली करने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा। आने वाले समय में इस मामले पर राज्य और शीर्ष अदालत दोनों की नजरें टिकी रहेंगी।
क्या था संवैधानिक संकट?
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अभी तक किसी भी सदन—विधानसभा या विधान परिषद—के सदस्य नहीं थे। मंत्री बनने के बाद संवैधानिक रूप से 6 महीने की अवधि पूरी हो चुकी थी। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) स्पष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर नहीं रह सकता।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह ने अदालत में बताया था कि दीपक प्रकाश को मंत्री बने 7 महीने 22 दिन से अधिक समय हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक किसी सदन की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। इसी आधार पर उनके मंत्री पद को लेकर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला
मंत्री दीपक प्रकाश के पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने संवैधानिक सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि जब कोई व्यक्ति किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो वह 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बना रह सकता है? अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब भी मांगा था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘यह पूरी तरह कानूनी मामला है। कोई व्यक्ति बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने 6 महीने से ज्यादा समय तक मंत्री कैसे रह सकता है।’
NDA ने ऐसे निकाला रास्ता
सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा जवाब दाखिल किए जाने से पहले ही NDA ने इस संवैधानिक संकट का हल ढूंढ लिया है। देवेश कुमार के इस्तीफे और दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी के साथ उनके मंत्री पद को जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला NDA की राजनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है, जिसने एक संभावित कानूनी अड़चन को कुशलता से टाल दिया है।
इस कदम से बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का कार्यकाल सुरक्षित हो गया है और अब वे बिना किसी संवैधानिक बाधा के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।








