Bihar Politics: अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी कांड का मुद्दा अब संसद में भी गरमा गया है। इस मामले पर संसद के दोनों सदनों में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई। इसी कड़ी में पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। वह संत के वेश में संसद भवन पहुंचे और खुद को ‘भगवाधारी चोर’ के रूप में प्रस्तुत किया।
संसद परिसर में हुई इस नाटकीय नौटंकी में फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। सभी सांसद बारी-बारी से पप्पू यादव के सामने रखे दानपत्र में पैसे चढ़ाते दिखे। पप्पू यादव उन पैसों को अपनी जेब में रखते गए, जिससे यह पूरा अभिनय और भी जीवंत हो उठा।






संसद में ‘चढ़ावा चोर’ पप्पू यादव का हाई वोल्टेज ड्रामा
जैसे ही संत बने पप्पू यादव के सामने चढ़ावा चढ़ाया गया, उन्होंने पैसे अपनी जेब में रख लिए। डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और राहुल गांधी ने भी इस अभिनय में पूरा सहयोग दिया और पैसे चढ़ाए। पप्पू यादव सारा चढ़ावा ‘गप’ करते चले गए। जब दानपात्र में काफी पैसे जमा हो गए और वह लगातार उन्हें अपनी जेब में रखते रहे, तो वहां मौजूद अन्य सांसदों ने उन्हें ‘मारने’ का अभिनय शुरू कर दिया।
इंडिया गठबंधन के सांसदों ने पप्पू यादव को ‘पिटने’ का नाटक किया। पिटते-पिटते थक चुके पप्पू यादव उठे और मंदिर का दानपात्र लेकर भागने लगे। उनके हाथों में भगवान राम की तस्वीर भी थी। जैसे ही वह भागे, सांसद अवधेश प्रसाद ने उन्हें ‘धर दबोचा’। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पप्पू यादव को पकड़ने के बाद जब उनसे पूछा गया कि कैसे पकड़े गए, तो उन्होंने कहा, ‘अयोध्या वालों ने पकड़ लिया।’
दानपात्र छोड़कर भागे, फिर पकड़े गए
पप्पू यादव इतनी तेजी से भागे कि दानपात्र उनके हाथ से छूटकर गिर गया और साथी सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी को ‘चढ़ावा चोर पार्टी’ करार दिया। पप्पू यादव का यह अनोखा अंदाज देखकर लोग लोटपोट हो रहे हैं। संसद भवन के भीतर हुई यह नौटंकी सोशल मीडिया पर छाई हुई है, जहां लोग ‘चंदा चोर कहां मिलेगा, बीजेपी के दफ्तर में’ जैसे नारे लगाते दिख रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचने का एक नाटकीय प्रयास था।








