Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान पार्षद (MLC) बिहार से देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के सभापति को सौंप दिया है। उनके इस कदम से बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद का रास्ता साफ हो गया है, जिन्हें संवैधानिक प्रावधानों के तहत छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद तेज हुई सियासी हलचल
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री दीपक प्रकाश से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से सवाल किया था। कोर्ट ने पूछा था कि जब दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं, तो वे मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। इस टिप्पणी के बाद से ही इस मामले ने गति पकड़ ली थी। अब देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद, सरकार जल्द ही दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।






कौन हैं देवेश कुमार? पत्रकारिता से राजनीति तक का उनका सफर
देवेश कुमार का जन्म 30 अगस्त 1964 को समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड के मोहम्मदपुर देवपाट गांव में हुआ था। वे जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता यमुना कारजी के पोते हैं। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक माहौल में अपनी पहचान बनाई है।
उन्होंने पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल और रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में सक्रिय होने से पहले, देवेश कुमार ने लंबे समय तक पत्रकारिता की दुनिया में काम किया। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर गहराई से रिपोर्टिंग की, जिसने उनके राजनीतिक जीवन की नींव रखी।
भाजपा से जुड़ने के बाद, देवेश कुमार ने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं। वे बिहार भाजपा के प्रदेश महासचिव भी रहे। उनकी संगठनात्मक क्षमता और अनुभव को पार्टी में काफी महत्व दिया जाता है। 17 मार्च 2021 को, देवेश कुमार राज्यपाल के मनोनीत कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य बने थे और सदन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
मंत्री दीपक प्रकाश के लिए अब आगे क्या है रास्ता?
संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर किसी न किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। दीपक प्रकाश फिलहाल मंत्री हैं, लेकिन वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। देवेश कुमार के इस्तीफे से अब यह सीट खाली हो गई है, जिससे दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
माना जा रहा है कि बिहार सरकार जल्द ही इस सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करेगी। इस कदम से मंत्री दीपक प्रकाश की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और कैबिनेट में उनकी निरंतरता सुनिश्चित होगी।








