Pakistan Iran: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में मध्यस्थता की भूमिका निभाने का ख्वाब देख रहे पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने मध्यस्थ देशों की सूची से पाकिस्तान को बाहर कर दिया है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गहरी फजीहत का सामना करना पड़ा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान महीनों से अमेरिका की ‘जी-हुजूरी’ करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था, ताकि उसे ईरान संकट में मध्यस्थ बनने का मौका मिल सके।
किन देशों को मिली ट्रंप की हरी झंडी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए बयान में स्पष्ट किया कि ईरान के कहने पर समझौते को लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है। उन्होंने इस बातचीत में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर की मध्यस्थता का विशेष जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान का नाम कहीं नहीं लिया, जिससे उसकी कूटनीतिक स्थिति और भी कमजोर पड़ गई।






ट्रंप ने कहा, ‘हम बात कर रहे हैं। हम ईरान के रिक्वेस्ट पर बात कर रहे हैं। इस बातचीत में सऊदी अरब की भूमिका है, इसमें UAE की भूमिका है, इसमें कतर की भूमिका है।…’
इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अमेरिका ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया है।
आखिर क्यों अमेरिका ने पाक पर नहीं किया भरोसा?
पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा था, लेकिन दोनों ही देशों ने उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। ईरानी अधिकारियों ने पाकिस्तान के ‘अमेरिका प्रेम’ को देखते हुए उससे दूरी बना ली थी। वहीं, अमेरिका के कई सांसद भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर संदेह जता चुके हैं। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तो यहां तक आगाह किया था कि ईरान के सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस में रखे हुए हैं।
ग्राहम का यह दावा हालिया रिपोर्टों से और भी पुख्ता होता दिख रहा है। इन रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ईरान को चीनी हथियार सप्लाई कर रहा है। बताया गया है कि चीन और ईरान के बीच हुए एक समझौते के तहत, पाकिस्तान अपने क्षेत्र से चीनी एयर डिफेंस सिस्टम ईरान तक पहुंचा रहा है। ऐसी खबरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक भी निश्चित रूप से पहुंची होंगी, जिसने पाकिस्तान की विश्वसनीयता को और कम किया।
ईरान को ट्रंप की आखिरी चेतावनी
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके पास परमाणु समझौते को स्वीकार करने का यह आखिरी मौका है, अन्यथा उसे ‘बर्बादी’ का सामना करना पड़ सकता है। वाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने यह भी बताया कि क्षेत्रीय ताकतों के अनुरोध पर तेहरान के साथ बातचीत चल रही है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, ‘मुझे लगता है कि शायद हमें कुछ हासिल हो जाए, लेकिन मैं उन्हें बर्बादी से पहले हर आखिरी मौका देना चाहता हूं। यह ईरान के लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है।’
ट्रंप का यह कड़ा रुख ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा कूटनीतिक झटका है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है।








