Bihar Arms Act: दरभंगा में हथियार से जुड़े एक गंभीर मामले में तीन दोषियों को बड़ा झटका लगा है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने आर्म्स एक्ट के तहत सजा पाए मो. आरजू खान, मो. एक्लाखूर्रहमान और मो. अब्दुल रहमान की तीन अलग-अलग अपीलों को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को भी बरकरार रखा गया है। यह फैसला शुक्रवार को आया, जिसके बाद दोषियों के पास अब पटना हाईकोर्ट जाने का ही विकल्प बचा है।
फास्ट ट्रैक पर हुई आर्म्स एक्ट के दोषियों की सुनवाई
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इस मामले में न्याय की त्वरित प्रक्रिया पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों की अपील में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई पूरी की गई। अपील दायर होने के महज आठ महीने के अंदर ही न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने दाण्डिक अपील संख्या 26/25, 28/25 और 34/25 में तीनों अपीलार्थियों की अपीलें खारिज कर दीं।






लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया, “आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले के अपील में त्वरित न्याय निर्णय वास्ते प्राथमिकता के आधार पर अपील की सूनवाई पूरी की गई। महज 08 माह के अन्दर तीनों अपीलार्थियों का अपील खारिज हो गया।”
अदालत ने मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (सीजेएम) जूनैद आलम द्वारा 18 नवंबर 2025 को पारित और सुनाई गई सजा को पूरी तरह से विधि सम्मत करार दिया और उनके निर्णय की पुष्टि कर दी। यह दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की गई।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुई गिरफ्तारी?
यह मामला नगर थाना से जुड़ा है। पुलिस को सूचना मिली थी कि सेनापत मुहल्ला में कुछ अपराधी किसी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मो. आरजू खान के घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान मो. आरजू के पास से एक मैगजीन युक्त पिस्टल बरामद हुई। वहीं, मो. एक्लाखूर्रहमान के पास से एक देशी कट्टा और मो. अब्दुल रहमान के पास से एक बटनयुक्त चाकू और कारतूस मिले।
इस बरामदगी के बाद नगर थाना में कांड संख्या 228/24 दर्ज किया गया था। इस मामले का विचारण मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी जूनैद आलम की अदालत में हुआ था।
निचली अदालत का फैसला, सत्र न्यायालय की मुहर
सीजेएम जूनैद आलम ने 18 नवंबर 2025 को तीनों आरोपियों को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-b)a के तहत दो वर्ष के कारावास और धारा 26(1) के तहत भी दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक को पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया था। इसी निर्णय के खिलाफ तीनों सजायाफ्ता अपराधियों ने अलग-अलग तीन दाण्डिक अपीलें सत्र न्यायालय में दाखिल की थीं। अब जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने इन अपीलों को खारिज करते हुए सीजेएम द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद, सभी सजायाफ्ता को अब पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।








