Purnia Snakebite: बिहार के पूर्णिया जिले में एक बेहद दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जानकीनगर थाना क्षेत्र के रमजानी गांव में गुरुवार देर रात मां के साथ सो रही दो सगी बहनों की सांप के काटने से मौत हो गई। इस हृदयविदारक खबर से परिवार में कोहराम मच गया और गांव में मातम पसरा हुआ है।
पूर्णिया में दिल दहला देने वाली घटना: मां के साथ सो रही दो मासूमों को सांप ने डसा, फिर जो हुआ…
Purnia Snakebite: बिहार के पूर्णिया जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां नींद में सो रही दो सगी बहनों की सर्पदंश से मौत हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार और रमजानी गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। गुरुवार देर रात हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद परिजनों ने पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया, लेकिन मासूमों को बचाया नहीं जा सका।






जानकारी के अनुसार, जानकीनगर थाना क्षेत्र के रूपौली दक्षिण पंचायत के वार्ड नंबर एक स्थित रमजानी गांव में यह दर्दनाक हादसा हुआ। देर रात मां के साथ पलंग पर मच्छरदानी लगाकर सो रही 15 वर्षीय साक्षी और उसकी छोटी बहन 3 वर्षीय निशा को सांप ने डस लिया। सुबह होने पर जब स्थिति बिगड़ी तो परिवार वालों ने उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक करवाना शुरू कर दिया।
पूर्णिया में सांप के डसने से दो बच्चियों की मौत, पोस्टमार्टम से इनकार
मां के साथ सो रहीं दोनों मासूम बच्चियों को सांप के डसने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अंधविश्वास के चलते चिकित्सकों से इलाज कराने के बजाय ओझा गुनी से झाड़-फूंक कराई। हालांकि, झाड़-फूंक के बाद भी दोनों बहनों की जान नहीं बच सकी। इस घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है।
परिजनों ने दोनों बच्चियों के शव का पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे अपनी बेटियों का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के खतरे और अंधविश्वास के चलते होने वाली मौतों की ओर ध्यान खींचा है। तीन और पंद्रह साल की उम्र में दो बेटियों को खोने वाले माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर आंख नम है और लोग इस हृदयविदारक घटना से स्तब्ध हैं।
एक ही पलंग पर सोई थीं दोनों मासूम
रूपौली दक्षिण पंचायत के वार्ड नंबर एक स्थित रमजानी गांव में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। जानकारी के अनुसार, गुरुवार की देर रात 15 वर्षीय साक्षी और उसकी छोटी बहन 3 वर्षीय निशा अपनी मां के साथ घर में पलंग पर मच्छरदानी लगाकर सो रही थीं। रात के अंधेरे में एक जहरीले सांप ने दोनों मासूम बच्चियों को डस लिया। जब तक परिवार को कुछ समझ आता, सांप का जहर उनके शरीर में फैल चुका था।
झाड़-फूंक में गंवाया समय, पोस्टमार्टम से भी इनकार
सर्पदंश के बाद बच्चियों की हालत बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया। अंधविश्वास के चलते बहुमूल्य समय गंवा दिया गया, और जब तक वे आधुनिक चिकित्सा सुविधा के बारे में सोचते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों बहनों की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया, जिससे घटना की विस्तृत जांच और सांप के प्रकार का पता नहीं चल सका। परिवार का यह फैसला सदमे और पारंपरिक मान्यताओं का मिश्रण प्रतीत होता है।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के प्रति जागरूकता और तत्काल चिकित्सा सहायता के महत्व को उजागर किया है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक की लहर है।








