Darbhanga Rape Case: बिहार के दरभंगा में सिविल कोर्ट के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दुष्कर्म के एक दोषी को करार दिया है। बैका निवासी 28 वर्षीय मो. सरताज, जो मो. हमीदुल का पुत्र है, को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी पाया गया है। इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें 22 अगस्त पर टिकी हैं, जब अदालत उसकी सजा की अवधि तय करेगी।
क्या है पूरा मामला? कब और कैसे हुआ था दुष्कर्म?
लोक अभियोजक (पीपी) अमरेंद्र नारायण झा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 28 मार्च 2022 को सकतपुर थानाक्षेत्र में हुई थी। अभियुक्त मो. सरताज ने एक महिला को डरा-धमकाकर जबरन दुष्कर्म किया था। इस गंभीर अपराध के बाद सकतपुर थाना में दुष्कर्म के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि अदालत ने दूष्कर्मी का जमानत बंधपत्र खंडित कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
गवाहों की गवाही और अदालत का फैसला
अदालत में इस मामले का विचारण सत्रवाद संख्या 349/22 के तहत शुरू हुआ। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी बात साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश किए। इसमें अनुसंधान अधिकारी (आईओ), डॉक्टर और मजिस्ट्रेट सहित कुल छह गवाहों की गवाही दर्ज कराई गई। इन गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर ही अदालत ने मो. सरताज को दोषी करार दिया। दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद, अदालत ने अभियुक्त का जमानत बंधपत्र रद्द करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
अब 22 अगस्त को सिविल कोर्ट दरभंगा यह तय करेगी कि दोषी मो. सरताज को कितने साल की सजा सुनाई जाएगी। इस फैसले का इंतजार न सिर्फ पीड़ित पक्ष बल्कि पूरे समाज को है, क्योंकि यह न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।






