Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में प्याज और चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताह में चीनी के दाम डेढ़ गुना और प्याज के दाम दोगुने तक बढ़ गए हैं, जिससे रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस महंगाई की मार सिर्फ घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चाय, मिठाई और जलपान के कारोबारियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
प्याज और चीनी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि
बाजार में एक सप्ताह पहले करीब 40 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 70 से 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसी तरह, 35-40 रुपये प्रति किलो मिलने वाला प्याज अब 60 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इस तेज वृद्धि ने खासकर गृहिणियों और छोटे कारोबारियों को चिंता में डाल दिया है।
गुदरी के दुकानदार प्रमोद कुमार, दरभंगा मौलागंज के रामभरोसे और मिर्जापुर के सुबोध ने बताया, “अचानक कीमत बढ़ने से चाय और मिठाई की लागत पर सीधा असर पड़ा है। हमें कीमत बढ़ाने और मुनाफा कम करने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।”
चीनी से बनने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्याज की बढ़ती कीमतों से जलपान दुकानों और रेस्टोरेंट कारोबार भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि सब्जी, पकौड़े, चटनी और सलाद जैसे कई व्यंजनों में प्याज का इस्तेमाल होता है।
आम लोगों और कारोबारियों पर महंगाई की मार
दरभंगा रेलवे स्टेशन, उर्दू बाजार, बेंता, बेला मोड़, कादिराबाद, दोनार, दिल्ली मोड़, लहरियासराय बस स्टैंड, सैदनगर और लोहिया चौक के दुकानदारों ने बताया कि प्याज की कीमत बढ़ने के कारण उन्हें खाद्य सामग्री में प्याज की मात्रा कम करनी पड़ रही है या फिर व्यंजनों का आकार छोटा करना पड़ रहा है। गृहिणियों पर भी इस महंगाई की सीधी मार पड़ी है।
महिलाओं ने बताया, “रोजमर्रा की कई वस्तुएं पहले से ही महंगी हैं। अब प्याज और चीनी की कीमत में अचानक वृद्धि से घरेलू बजट बिगड़ गया है। कई परिवार अब किलो के बजाय पाव में खरीदारी करके जरूरत पूरी कर रहे हैं।”
महिलाओं ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए बाजार की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
कीमतों में वृद्धि के पीछे के कारण
थोक और खुदरा कारोबारियों के अनुसार, बाजार में आवक, आपूर्ति और मांग के बीच अंतर के कारण कीमतों में तेजी आई है। कारोबारियों ने त्योहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली) से पहले मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री की बढ़ती मांग और स्टॉक बढ़ाने की प्रवृत्ति को भी एक वजह बताया है। उन्होंने जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आशंका भी जताई है।
चीनी कारोबारियों का कहना है कि गन्ने का उपयोग चीनी के साथ-साथ इथेनॉल उत्पादन में भी होने लगा है, जिससे चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। वहीं, दरभंगा टावर के प्याज कारोबारियों मुकेश कुमार, बिहुति, संजीव मुखिया के अनुसार, इस वर्ष रबी प्याज का उत्पादन लगभग 15 से 27 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में मार्च में हुई बेमौसम बारिश ने फसल की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता को प्रभावित किया। नई खरीफ प्याज की आवक अक्टूबर से शुरू होती है, लेकिन मानसून में देरी के कारण इसमें भी विलंब हो रहा है, जिससे पुराने स्टॉक के खत्म होने और नई फसल की आवक में देरी के बीच प्याज के भाव में अचानक तेजी आई है।
इस स्थिति को देखते हुए, आगामी दिनों में यदि आपूर्ति में सुधार नहीं होता है, तो प्याज और चीनी की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता और कारोबारियों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी।






