Muzaffarpur AK-47 Case: बिहार में एके-47 जैसे खतरनाक हथियारों की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ी कार्रवाई की है। मुजफ्फरपुर AK-47 केस में एनआईए ने एसटीएफ के सहयोग से ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से कुख्यात अपराधी भैरव त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। भैरव त्रिपाठी के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों की तस्करी सहित आठ गंभीर मामले दर्ज हैं और वह पिछले दो वर्षों से पुलिस की गिरफ्त से बच रहा था। उसकी गिरफ्तारी को इस बड़े हथियार तस्करी रैकेट की गुत्थी सुलझाने में अहम माना जा रहा है।
मुजफ्फरपुर AK-47 तस्करी: दो साल से फरार ‘मास्टरमाइंड’ दबोचा! NIA के हाथ लगा बड़ा सबूत
Bihar AK-47: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बिहार में AK-47 बरामदगी के एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। विशेष कार्य बल (STF) के सहयोग से मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र से फरार चल रहे हथियार तस्कर भैरव त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया है। भैरव त्रिपाठी के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत आठ गंभीर मामले दर्ज हैं और वह पिछले दो वर्षों से पुलिस की पकड़ से दूर था। इस गिरफ्तारी से हथियार तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद जगी है।


NIA की गिरफ्त में AK-47 तस्करी का अहम मोहरा
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने खुफिया जानकारी के आधार पर ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले से भैरव त्रिपाठी को दबोचा। स्थानीय पुलिस और एसटीएफ ने इस कार्रवाई में एनआईए का साथ दिया। गिरफ्तारी के बाद, एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भैरव से गहन पूछताछ कर रही हैं। जांच एजेंसियां अब उससे हथियारों की खरीद-बिक्री, इसके लिए फंडिंग और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही हैं। भैरव त्रिपाठी साहेबगंज थाना क्षेत्र के अहियापुर गांव का निवासी है।
मुजफ्फरपुर से कैसे शुरू हुई AK-47 तस्करी की जांच?
इस मामले की शुरुआत 5 जुलाई 2024 को हुई थी, जब पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मुजफ्फरपुर जंक्शन से विकास कुमार और सत्यम कुमार को AK-47 के लेंस और बट के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वे दीमापुर से हथियारों की खेप लाकर बिहार में बेचते थे। जांच में खुलासा हुआ कि पूर्वी चंपारण के मधुबन निवासी मोहम्मद अहमद अंसारी दीमापुर में उन्हें AK-47 और अन्य विदेशी हथियार सप्लाई करता था। विकास ने हाल ही में फकुली थाना क्षेत्र के मनकौली निवासी मुखिया के पुत्र देवमनी कुमार को एक AK-47 बेची थी। इसके बाद पुलिस ने मुखिया के घर छापेमारी की और मनकौली श्मशान घाट से एक AK-47 तथा पांच जिंदा कारतूस बरामद किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अगस्त 2024 में पुलिस ने यह केस एनआईए को सौंप दिया था। तब से एनआईए इस अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क की जांच कर रही है।
भैरव त्रिपाठी का आपराधिक इतिहास और नेटवर्क में भूमिका
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि भैरव त्रिपाठी, विकास और मंजूर खान के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी में सक्रिय था। वह दीमापुर से आने वाले हथियारों को बिहार के विभिन्न जिलों में सप्लाई करने में मदद करता था। भैरव त्रिपाठी के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े आठ मामले अलग-अलग थानों में दर्ज हैं और वह लंबे समय से पुलिस के लिए वांछित था। इस मामले में एनआईए अब तक छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें मिठनपुरा के तीनकोठिया मोहल्ले के मंजूर खान, मनकौली के देवमनी कुमार, जैतपुर के पोखरैरा निवासी विकास कुमार, वैशाली जिले के हाजीपुर अनजान पीर निवासी सत्यम कुमार और मधुबन के अहमद अंसारी शामिल हैं।
भैरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी इस बड़े हथियार तस्करी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में एनआईए के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। उससे मिलने वाली जानकारी से इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके ठिकानों का खुलासा होने की संभावना है, जिससे बिहार में अवैध हथियारों की आवाजाही पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। एनआईए इस मामले की तह तक जाने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है।
मुजफ्फरपुर जंक्शन से हुई थी AK-47 तस्करी की शुरुआत
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत 5 जुलाई 2024 को मुजफ्फरपुर जंक्शन से हुई थी। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर विकास कुमार और सत्यम कुमार को AK-47 के लेंस और बट के साथ रंगे हाथों पकड़ा था। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने खुलासा किया था कि वे दीमापुर से हथियारों की खेप लाकर बिहार में बेचते थे। उनकी निशानदेही पर यह भी पता चला कि पूर्वी चंपारण के मधुबन निवासी मोहम्मद अहमद अंसारी दीमापुर में उन्हें एके-47 और अन्य विदेशी हथियार सप्लाई करता था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विकास ने हाल ही में फकुली थाना क्षेत्र के मनकौली निवासी मुखिया के पुत्र देवमनी कुमार को एक एके-47 बेची थी। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने मुखिया के घर छापेमारी की और मनकौली श्मशान घाट में छिपाकर रखी गई एक एके-47 और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अगस्त 2024 में बिहार पुलिस ने इस केस को एनआईए को सौंप दिया था, जिसके बाद से एनआईए इस अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
NIA की गिरफ्त में अब तक 6 आरोपी, भैरव त्रिपाठी का नेटवर्क
एनआईए ने खुफिया इनपुट के आधार पर ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले से भैरव त्रिपाठी को स्थानीय पुलिस और एसटीएफ की मदद से दबोचा। जांच में खुलासा हुआ कि भैरव त्रिपाठी, पहले से गिरफ्तार विकास और मंजूर खान के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी में सक्रिय था। वह दीमापुर से आने वाले हथियारों को बिहार के विभिन्न जिलों में सप्लाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
इस मामले में एनआईए अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मिठनपुरा के तीनकोठिया मोहल्ले के मंजूर खान, मनकौली के देवमनी कुमार, जैतपुर के पोखरैरा निवासी विकास कुमार, वैशाली जिले के हाजीपुर अनजान पीर निवासी सत्यम कुमार और मधुबन के अहमद अंसारी शामिल हैं। भैरव त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियां उससे हथियारों की खरीद-बिक्री, फंडिंग के स्रोतों और उसके गिरोह तथा नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में गहन पूछताछ कर रही हैं। इस गिरफ्तारी से इस बड़े हथियार तस्करी रैकेट के कई और अहम राज खुलने की उम्मीद है।







