Bihar Flood Alert: बिहार में बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है। पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बैराज पर हाई अलर्ट जारी किया गया है, जहां अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नेपाल में लगातार फ्लैश फ्लड की आशंका और जलस्तर बढ़ने के संभावित खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
वर्तमान में गंडक बैराज से 1,02,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी के दबाव और संभावित बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैराज के सभी 36 फाटक पूरी तरह खोल दिए गए हैं। पश्चिमी चंपारण, बगहा, गोपालगंज, बेतिया और मोतिहारी सहित कई इलाकों में प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल से खतरे की आशंका और जलस्तर में बढ़ोतरी
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में मौसम की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश होने पर नदियों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे फ्लैश फ्लड की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी आशंका को देखते हुए गंडक नदी के किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से ही सतर्क किया जा रहा है।
जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले 72 घंटे स्थिति के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो सकते हैं। विभाग लगातार नदी के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी की मात्रा पर पैनी नजर रख रहा है। सभी संबंधित अधिकारियों को चौकसी बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इन जिलों पर सबसे ज्यादा असर, प्रशासन अलर्ट पर
गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोलने का निर्णय नदी में पानी के दबाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए लिया गया है। नदी में पानी की मात्रा बढ़ने पर निचले इलाकों में गंभीर असर पड़ने की आशंका है, जिसके मद्देनजर प्रशासन पहले से ही व्यापक तैयारियों में जुट गया है। पश्चिमी चंपारण के बगहा और वाल्मीकि नगर क्षेत्र के साथ-साथ गोपालगंज, बेतिया और मोतिहारी के प्रशासन को भी पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है।
स्थानीय अधिकारियों को नदी किनारे के गांवों की स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासन लोगों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना का पालन करने की अपील कर रहा है। संभावित आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को भी तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।







