Bihar Lok Adalat: शनिवार को दरभंगा में आयोजित साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने हजारों लोगों को बड़ी राहत दी है। इस एक दिवसीय आयोजन में कुल 4360 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया, जिससे 10 करोड़ 38 लाख 75 हजार 332 रुपये से अधिक का सेटलमेंट हुआ। इस पहल ने सिर्फ कानूनी उलझनों को ही नहीं सुलझाया, बल्कि कई बिछड़े हुए दंपतियों को फिर से एक कर समाज में शांति का संदेश दिया।
प्रभारी जिलाजज संतोष कुमार पाण्डेय ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपसी विवाद सभ्य समाज के लिए अभिशाप हैं, जबकि समझौता सबके लिए सुखदायी होता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत मामलों के त्वरित और सुलभ निष्पादन का सबसे आसान तरीका है, जो मन की कटुता को भी खत्म करता है। यह पक्षकारों के लिए अपने समय, धन और ऊर्जा को बचाने का एक सुनहरा अवसर है।

हजारों मामलों का त्वरित निपटारा, करोड़ों का सेटलमेंट
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक पदाधिकारियों की अध्यक्षता में कुल 22 खंडपीठों का गठन किया गया था। इनमें तलाकवाद, भरणपोषण वाद, क्षतिपूर्ति दावावाद, क्लेम, उत्पाद, लेबर, वन अधिनियम, एमवी एक्ट के साथ-साथ विभिन्न बैंकों के ऋण, टेलीफोन और बिजली से संबंधित मामले शामिल थे।
डीएम सह प्राधिकार के उपाध्यक्ष कौशल कुमार ने कहा, ‘लोक अदालत पक्षकारों के शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह आपको अपने मामले को खुद समाप्त कराने का कानूनी अधिकार देता है। जरूरत इस बात की है कि जिले के लोग इसका लाभ उठाएं, मिल-जुलकर समाज में रहें और अपनी ऊर्जा को विकास कार्यों में लगाएं।’
एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने ऋणमुक्ति को लोक अदालत का एक महत्वपूर्ण लाभ बताया। उन्होंने कहा कि ऋण का बोझ व्यक्ति को कुंठित कर देता है, और लोक अदालत इससे मुक्ति का सुअवसर प्रदान करती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे लोगों के बहुमूल्य समय और धन की बचत होती है, जो समाज और राष्ट्र के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
44 साल पुराने केस भी हुए खत्म, बिछड़े परिवार फिर साथ
लोक अदालत की बेंचों ने कुछ बेहद पुराने और जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक निपटाया। एसडीजेएम कोर्ट में 44 वर्षों से चल रहे अति पुराने आपराधिक मामलों को एसडीजेएम सत्यम की बेंच ने खत्म किया। वहीं, बेंच संख्या 10 के पीठासीन पदाधिकारी कुमार रितेश ने 30 साल पुराने विश्वविद्यालय थानाकांड संख्या 106/96 का विचारणवाद में पक्षकारों की सहमति से कैदराबाद निवासी नवीन खट्टिक और रामबाबू साह को मुकदमे से राहत दिलाई। इसके अतिरिक्त, सैकड़ों छोटे-छोटे ट्रैफिक चालान के मामलों का भी निष्पादन किया गया, जिससे लोक अदालत का मूल उद्देश्य चरितार्थ हुआ।
सचिव आरती कुमारी ने लोगों से अपील करते हुए कहा, ‘यह आपकी अपनी अदालत है। इसमें छिपे मर्म को समझें। लोग आएं और अपना मुकदमा समाप्त करा समाज में शांति का पैगाम दें।’
इस आयोजन में परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश प्रमोद कुमार पंकज, एडीजे भूपेंद्र सिंह, नवीन कुमार ठाकुर, एसीजेएम अंकिता जायसवाल, सीजेएम जूनैद आलम सहित बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रधर मल्लिक और महासचिव कृष्ण कुमार मिश्रा भी मौजूद रहे। ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों का निष्पादन और गणना अभी भी जारी है।







