Bihar DM Powers: बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब जिलाधिकारियों (DM) को असामाजिक तत्वों और संगठित अपराधियों पर नकेल कसने के लिए विशेष प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियां दी गई हैं। इन बढ़ी हुई Bihar DM Powers के तहत, पेपर लीक से लेकर जमीन और बालू माफिया तक, 7 नए तरह के अपराधों पर बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) लागू होगा। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के सभी डीएम को यह अधिकार 25 सितंबर से 24 मार्च 2027 तक के लिए सौंपे गए हैं।
इस महत्वपूर्ण फैसले से अब जिलाधिकारी को यह अधिकार मिल गया है कि वे ऐसे अपराधी या असामाजिक तत्वों को, जिनसे शांति भंग होने या अपराध करने की आशंका हो, बिना लंबी अदालती प्रक्रिया के सीधे हिरासत में भेजने का आदेश दे सकें। यह कदम राज्य में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

डीएम के पास अब क्या-क्या अधिकार?
संशोधित बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) के तहत, जिलाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण शक्तियां मिली हैं। यदि कोई आरोपी शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने से इनकार करता है या उसका उल्लंघन करता है, तो डीएम उसे सीधे जेल भेजने का आदेश दे सकते हैं। डीएम को यह तय करने की पूरी छूट होगी कि किसी व्यक्ति पर कार्रवाई करने के लिए कौन सा सबूत पर्याप्त है, और इस प्रक्रिया में भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के कड़े नियम आड़े नहीं आएंगे।
इसके अलावा, यदि कोई आरोपी आदेश या नोटिस के बाद फरार होता है, तो जिलाधिकारी उसकी संपत्ति को कुर्क करने और जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं। पहली बार में किसी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, और राज्य सरकार की मंजूरी से यह अवधि बाद में 6-6 महीने के लिए बढ़ाई जा सकती है। डीएम को बॉन्ड भरवाने और वारंट जारी करने के मामले में एक सक्षम अदालत या न्यायालय का दर्जा और शक्तियां प्राप्त हैं।
जिलाधिकारियों को अब चिह्नित अपराधी को जिले या उसके किसी हिस्से से बाहर जाने, समय-समय पर थाने में हाजिरी लगाने और अपनी गतिविधियों की जानकारी देने का आदेश देने का अधिकार होगा। वे संदिग्धों की तलाशी और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी कर सकेंगे, साथ ही वारंट जारी करने और लोक व्यवस्था के लिए खतरा बनने वाले लोगों को हिरासत में लेने का भी आदेश दे सकेंगे।
इन 7 नए अपराधों पर भी लगेगा CCA का शिकंजा
संशोधित कानून में अपराध की कई नई और महत्वपूर्ण श्रेणियों को शामिल किया गया है। अब निम्न गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ भी CCA के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकेगी:
- सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने या उसे भारी नुकसान पहुंचाने पर।
- पेपर लीक और संगठित कदाचार में शामिल होने पर।
- अवैध खनन करने पर।
- वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों में।
- सोशल मीडिया पर जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के नाम पर घृणा और शत्रुता फैलाने पर।
- मानव तस्करी में शामिल होने पर।
- विस्फोटक पदार्थ, हथियार, गोली या बम रखने अथवा इनके अवैध कारोबार में शामिल होने पर।
भू-माफिया, पेपर लीक और नफरत फैलाने वालों पर सीधी कार्रवाई
बिहार में लंबे समय से कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बने जमीन विवाद और भू-माफियाओं की गतिविधियों पर भी अब लगाम कसी जाएगी। जो लोग गैरकानूनी तरीके से किसी की चल या अचल संपत्ति पर कब्जा करते हैं या उसे बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं, उनके खिलाफ CCA लगाने का रास्ता साफ हो गया है। तोड़फोड़, उपद्रव या हिंसा के जरिये सार्वजनिक, सरकारी या निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों को सीधे हिरासत में भेजा जाएगा।
गंभीर साइबर धोखाधड़ी में शामिल और सीआईआरपीओ पोर्टल पर शिकायतों का सामना कर रहे आरोपियों पर भी कानूनी नकेल कसी जाएगी। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने, नकल कराने या प्रश्न-पत्र बेचने में शामिल पूरे सिंडिकेट पर सीधे निरोधक कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने, धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर घृणा, वैमनस्य या हिंसा भड़काने वाले पोस्ट करने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। इसके साथ ही, संगठित अपराध और रंगदारी देने या दो से अधिक व्यक्तियों के ऐसे गिरोह जो हिंसा, धमकी या दबाव बनाकर अवैध वसूली और रंगदारी करते हैं, उन्हें सीधे हिरासत में लिया जाएगा। बालू या गिट्टी का अवैध खनन करने वाले तथा जंगल की लकड़ी व वन्यजीवों की तस्करी से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों पर भी अब सख्त कार्रवाई होगी।
डीएम को मिली ये असीमित शक्तियां बिहार में अपराध नियंत्रण के लिए एक नया अध्याय शुरू करेंगी, जिससे राज्य में शांति और सुरक्षा का माहौल स्थापित करने में मदद मिलेगी।







