Bihar Food Safety: बिहार में खाद्य सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में 15 सितंबर 2026 को रोहतास, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों में विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों की गहन जांच की गई, जिसमें एक्सपायर्ड और दूषित खाद्य सामग्री बड़े पैमाने पर जब्त की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा टीमें अलग-अलग जिलों में निरीक्षण कर रही हैं। इन जांचों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के साथ-साथ स्वच्छता, भंडारण और खाद्य सुरक्षा मानकों का भी जायजा लिया जा रहा है। गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर एक प्रतिष्ठान को बंद भी कराया गया है, जबकि एक अन्य के लाइसेंस को निलंबित करने की सिफारिश की गई है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों पर सख्त कार्रवाई: एक्सपायर्ड पापड़ जब्त, प्लांट सील
रोहतास जिले में निरीक्षण के दौरान एक्सपायर्ड श्रीराम पापड़ पाया गया। आज खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजकुमार सिंह ने लाल जालाराम स्थित ‘बियॉन्ड ब्रेड रूट्स’ का निरीक्षण किया। संचालक मोहित सिंह की उपस्थिति में खाद्य सामग्री की जांच की गई, जिसमें श्रीराम पापड़ का एक पैकेट मिला जिसकी ‘यूज़-बाई’ अवधि जून 2026 में समाप्त हो चुकी थी। इस एक्सपायर्ड सामग्री को तत्काल जब्त कर कारोबारी की सहमति से मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
मुजफ्फरपुर में भी खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान पनीर और छेना मिठाई के कानूनी नमूने लिए गए। रामदयालु नगर में मुक्तिनाथ मंदिर के पास स्थित ‘श्री बाला जी स्वीट्स’ का निरीक्षण करने पर स्वच्छता और खाद्य सामग्री के भंडारण की स्थिति असंतोषजनक पाई गई। जांच अधिकारियों को यहां करीब 20 किलोग्राम संदूषित छेना मिठाई मिली, जिसे जब्त कर नियमानुसार नष्ट कराया गया। इसके साथ ही छेना मिठाई का कानूनी नमूना भी लिया गया।
समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर में लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश, कई नमूने जांच को भेजे
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, रोहतास और मुजफ्फरपुर के दोनों प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद्य प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा। इसी अभियान के तहत समस्तीपुर में एक फूड वेंडिंग प्रतिष्ठान में गंभीर अनियमितता मिलने के बाद उसके लाइसेंस को निलंबित करने की सिफारिश की गई है।
मुजफ्फरपुर में पनीर, छेना, राबड़ी और पेड़ा के कुल पांच नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं। गया-मोतिहारी रोड स्थित एक छेना मिठाई निर्माण प्लांट में भी निरीक्षण के दौरान गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके बाद उस प्लांट को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया। विभाग ने अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को भी साफ-सफाई बनाए रखने और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण के निर्देश दिए हैं।
खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य: 488 नमूनों की जांच, गुणवत्ता से समझौता नहीं
खाद्य सुरक्षा टीमों ने प्रतिष्ठान संचालकों को ‘FIFO (फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट)’ और ‘FEFO (फर्स्ट एक्सपायर्ड, फर्स्ट आउट)’ प्रणाली का पालन करने की सलाह दी है। इस प्रणाली के तहत खाद्य सामग्री के स्टॉक को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि पहले आने वाली या पहले एक्सपायर होने वाली सामग्री का समय पर उपयोग हो, जिससे एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या इस्तेमाल का जोखिम कम हो सके।
राज्य में खाद्य सुरक्षा जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। विभाग के अनुसार, अब तक कुल 488 खाद्य नमूने संग्रहित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 179 नमूने दूध और दूध उत्पादों से संबंधित हैं, जबकि मिठाई श्रेणी से 106 नमूने लिए गए हैं। अनाज और दाल के 65 नमूने, मसाले और सॉस के 64 नमूने, पेय पदार्थों के 37, स्ट्रीट फूड और बेकरी उत्पादों के 19 तथा खाद्य तेल के 18 नमूने भी जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं। मांस, मछली और अंडा श्रेणी के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
विभाग की कार्रवाई केवल नमूना लेने तक सीमित नहीं है। निरीक्षण के दौरान खराब, संदूषित या एक्सपायर्ड सामग्री मिलने पर उसे हटाने और नष्ट कराने की कार्रवाई भी की जा रही है। गंभीर कमियों वाले प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और संचालन बंद कराने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने स्पष्ट कहा है कि, “खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” उन्होंने खाद्य कारोबारियों को सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
कुमार रवि ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सपायर्ड, खराब, मिलावटी या असुरक्षित खाद्य सामग्री का भंडारण, इस्तेमाल और बिक्री किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निरीक्षण, नमूना संग्रहण और जांच की यह कार्रवाई आगे भी जारी रखने की बात कही गई है, ताकि जनता के स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सके।








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